कांतारा “चैप्टर-1” दक्षिण भारत से पुनः बाहुबली तांडव है बॉक्स ऑफिस पर कहाँ जाकर रुकता है, इसका फैसला गुलिगा देव करेंगे। साथ ही बॉलीवुड की साँसे पहले रुकेगी या इस चैप्टर की बॉक्स ऑफिस रफ़्तार। देखना वाक़ई दिलचस्प है।
साउथ के फ़िल्म मेकर्स में सीरीज को संभालने में निपुणता दिखाई देती है। राजमौली, प्रशांत नील और अब ऋषभ शेट्टी जुड़ गए। क्योंकि कांतारा की सफलता के बाद मेकर्स में प्रीक्वल का बजट 9 गुना बढ़ाकर 125 करोड़ कर दिया। इसमें ऋषभ की दोहरी ज़िम्मेदारी हो चली, मेकर्स और अपने दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरना था।
फिर क्या था! खरा नहीं बल्कि सिल्वर स्क्रीन फाड़ दिए है। स्क्रीन प्ले इतना एंगेजिग और थ्रिलिंग है कि अंत तक कनेक्ट सकती है। 2 घंटे 48 मिनट के स्क्रीन प्ले बताता है कि सनातन क्या है और भारतीय संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी है। इससे छेड़छाड़ करने वाले दंड भुगतेंगे। गुलिगा देव और गण स्वरूप सीक्वेंस रौंगटे खड़े कर जाते है।
अभिनय में ऋषभ शेट्टी वर्सेज ऑल है। इस अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कार नहीं मिले तो, बकवास है। एक्टिंग स्किल्स में इससे पीक कुछ नहीं है। जयराम, गुलशन देवैया और रुक्मणी वसंत ने अच्छी टक्कर दी है।
प्रोडक्शन डिजाइन में फ़िल्म का स्केल दिखाई देता है, आर्ट वर्क में सेट्स नेचर की गोद में लगाये है। सिनेमेटोग्राफी ने ऋषभ शेट्टी के अभिनय के साथ जुगलबंदी की है न, इससे नेचर की खूबसूरती निखकर आती है। क्लाइमेक्स में नंदी मोमेंट अहा…वीएफएक्स की व्याख्या देते है कि अच्छी नीयत से सीमित बजट में बड़ा इफ़ेक्ट डाला जा सकता है।
मैंने पहले भी कई बार लिखा है कि शेट्टीज यानी रक्षित और ऋषभ यूनिक स्टाइल फ़िल्म मेकर्स है। इनके कंटेंट में दर्शक कतई बोर नहीं हो सकता है।
सिनेमा में सनातनी परिपेक्ष्य में स्टोरी टेलिंग देखनी है तो पहली फुर्सत में अपने नजदीकी सिनेमाघरों में दस्तक दो।
वे लोग दूर रहे, जो कांतारा चैप्टर 1 के एक्सट्रीम पॉजिटिव वर्ड ऑफ़ माउथ के बाद कहेंगे कि क्या था, इतनी तारीफ़ सेकंड हाफ में कुछ मिनट अच्छे है। उन्हें सिनेमा देखना नहीं आता है तो न देखें तो अच्छा है।
अभी कई चैप्टर आने वाले है।
इसके बॉक्स ऑफिस आंकड़े बॉलीवुड को तगड़ा सेट बैक देंगे।
होंबले फिल्म्स के ग्रह नक्षत्र अच्छे चल रहे
हैं कि जिस कंटेंट में हाथ डालते है तो बॉक्स ऑफिस बारिश करता है।
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