संदीप देव। पुरी के तट पर स्थित महाप्रभु जगन्नाथ का नीलाचल धाम आज खतरे में है? एक ओर ‘श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना’ की आधुनिक चकाचौंध है, तो दूसरी ओर सदियों पुराने मंदिर के खजाने (रत्न भंडार) के तालों के साथ होती प्रशासनिक छेड़छाड़। 25 मार्च 2026 बुधवार दोपहर 12 बजे 48 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जब इस गुप्त खजाने को ‘सूचीकरण’ के नाम पर खोला गया, तो भक्तों के मन में हर्ष कम और आशंकाएं अधिक थीं! क्या यह केवल एक गणना है, या फिर सनातन धर्म के सबसे सुरक्षित मंदिर के खजाने में ‘सरकारी सेंधमारी’ की शुरुआत?
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हमे साइट नहि खुल रहा है ???
बहुत महत्वपूर्ण जानकारी, जय जगन्नाथ 🙏🚩
साइट खुल नहीं रहा है।
संदीप जी बहुत ही ज्ञानवर्धक रिपोर्ट।
गुरु,गोविंद और ग्रंथ विहीन संगठन का अब विनाश निश्चित है।
मेरी माताजी करीब 85 साल की है वे हमे हरहंमेश कहती है जो व्यक्ति देवद्रव्य का गलत उपयोग करता है इनका सर्वनाश हो जाता है देव द्रव्य किसीको भी पचता नही है।
जी आपकी माताजी ठीक कहती हैं। देव द्रव्य के लिए यहां शाकद्वीपी को बसाया गया था, क्योंकि भारत में देव द्रव्य लेना पाप था। बहुत धन्यवाद
kya wo ye janate nahi ki Jagnaath puri mandir me swayam bhagwan pratisthit hai. agar wo ye bhul rahe hai, to ye unki murkhta hai. …bhagwan ki shakti jo puri mein hai, wo sabko pata hai, ye jankar koi unka khajana chori karega, to uska parinaam bhi bhagwan ke shakti se bhuktega