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India Speak Daily > इतिहास > आजाद भारत > 1962 चीन युद्ध में आर्मी चीफ के मना करने के बाद भी नेहरू और मेनन ने सैकड़ों सैनिकों को युद्ध की आग में झोंक दिया था!
आजाद भारत

1962 चीन युद्ध में आर्मी चीफ के मना करने के बाद भी नेहरू और मेनन ने सैकड़ों सैनिकों को युद्ध की आग में झोंक दिया था!

Courtesy Desk
By Courtesy Desk 4 Min Read
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India Speaks Daily - ISD News
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अविनाश वाजपेयी। साठ के दशक में नेहरू के आंकलन के विपरीत चीन सिंगकियांग तिब्बत रोड के पश्चिम में सत्तर मील आगे बढ़ आया और चार हज़ार वर्ग किलो मीटर का क्षेत्र अपने कब्जे में ले लिया। नेहरू और डिफेंस मिनिस्टर कृष्ना मेनन को जवाब देना मुश्किल हो रहा था। इस दौरान नेहरू ने तब के सेना प्रमुख ‘पी एन थापर’ (पत्रकार करन थापर के पिता) को इन पोस्ट को छुड़ाने का आदेश दे दिया।

आर्मी चीफ ने नेहरू को आगाह किया ये बर्र के छत्ते में हाथ डालने जैसा काम होगा। इसके बाद मेनन के नेतृत्व में एक हाई लेवल मीटिंग हुई जिसमें सेना प्रमुख ने साफ़ साफ़ कह दिया भारतीय फ़ौज के पास जंग में जाने लायक ताकत नही है। भारत चाइना का रेसियो एक के मुकाबले छः का पड़ता है जिसको काटते हुए मेनन ने कहा कि उनको पुख्ता जानकारी है कि चाइना हिट बैक नही करेगा।

सेना प्रमुख बनते ही थापर ने 1960 में ही एक नोट सरकार को भेंजा था। जिसमे उन्होंने बताया था कि आर्मी इक्विपमेंट बहुत खराब हालात में हैं और पाकिस्तान और चाइना हमे आसानी से हरा सकते हैं। ऐसा लगता था सरकार चाइना से युद्ध करने पे आमादा थी, वह भी बिना किसी तैयारी के। मेनन के साथ बातचीत का फायदा न होते देख थापर ने नेहरू से मुलाक़ात के लिये वक्त माँगा।

मीटिंग से कुछ ही मिनट्स पहले कैबिनेट सेकेट्री ‘S S Khera’ आये और बोले “जनरल अगर मैं आपकी जगह होता तो अपना डर पंडित जी के सामने ना कहता, हो सकता है वो आपको लड़ाई से डरने वाला समझ लें” (if I were you, I would not express my fears before Panditji for he might think that you are afraid to fight) थापर ने कहा मुझे स्थिति की जानकारी प्रधानमंत्री को देनी है निर्णय उन्हें लेना है। थापर अपनी कार में बैठ रहे तभी खेरा ने फिर कहा “आपको पता होना चाहिए अगर लड़ाई नही हुई तो सरकार गिर जायेगी” (you must realise that if India did not fight, the government would fall.).

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थापर ने कार बन्द की और नेहरू से मिलने चल दिये। मन ही मन वो समझ गये थे चाइना से लड़ाई सामरिक हित के लिये नही राजनीति से प्रेरित है। हुआ आखिर वही जो नेहरू और मेनन चाहते थे और भारत को एक शर्मनाक हार झेलनी पड़ी बिना रशद पानी के भारतीय फौजी लड़ते रहे और जान देते रहे। 29 जुलाई 1970 में थापर ने कहा “उस समय मुझे अपना इस्तीफा सौंप देना चाहिये था, शायद मैं देश को उस शर्मनाक हार में से बचा लेता” सवाल ये है क्या सत्ता बचाने के लिये पंडित नेहरू ने बिना तैयारी के सेना को युद्ध में झोंक दिया? क्या नेहरू ने शहीदों के खून की दलाली की थी सत्ता के लिये?

साभार: कुलदीप नैयर की ‘Beyond The Lines’से कुछ अंश

नोट: यह लेखक के निजी विचार हैं। IndiaSpeaksDaily इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति उत्तरदायी नहीं है।

Courtesy Desk December 27, 2016
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TAGGED: ‬ ‪‎TheTrueIndianHistory, Indian Armed Forces, Jawaharlal Nehru

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