संदीप देव। जिन हिंदू मंदिरों में चप्पलों का प्रवेश वर्जित था,
‘कालनेमी’ काल में वह चप्पलों से रौंदा जा रहा है!
जिन हिंदू मंदिरों को माता अहिल्याबाई ने बनवाया था,
‘बहुरूपिया’ शासन में उसे क्रेन से तुड़वाया जा रहा है!
जिस मणिकर्णिका में मोक्ष मिलता था,
उसे उजाड़ कर नास्तिकता का बीज बोया जा रहा है!
जो काशी मंदिरों की भूमि थी,
कॉरिडोर के नाम पर उसे “शॉपिंग मॉल बनाया जा रहा है!
गजनी-औरंगजेब ने कभी जिसकी शुरुआत की थी,
उनकी ‘मानसिक संतानों’ द्वारा उस पर अंतिम मुहर लगाया जा रहा है!
