श्वेताभ पाठक ( श्वेत प्रेम रस ) प्रश्न:-अगर मन कमजोर पड़े और अनजान कारणों से भयभीत हो तो ऐसे में तत्काल क्या करना चाहिए?
उत्तर:- आदरणीय श्री श्वेताभ पाठक भैया जी
दृढ़ विश्वास रखिये उस परम सत्ता पर जिसके कारण सब कुछ चल रहा है ।
अगर आप स्वयं को कर्ता मानेंगे तो भय , डर , आशंका और अवसाद से ग्रसित हो जायेंगे ।
जहाँ आपने स्वयं को केवल निमित्त माना और समझा तो सब भय समाप्त हो जाएगा ।
भय किसे कहते हैं ??
भ माने प्रकाश अर्थात ज्ञान के प्रकाश का लोप हो जाना ।
तो तत्वज्ञान का प्रकाश सदा साथ रखिये ।
यह मन ही तो है जो आशंका और भय सोच रहा है ।
हमने उसके आशंका और भय को ही क्यों पकड़ा ??
उसने कुछ positive thoughts भी उपजायें होंगे , हमने उस पर अपना ध्यान क्यों नहीं दिया ??
कुछ नहीं करना है जो मन अभी भय और आशंका वाले thoughts को सोच सोच कर उसे powerful बना रहा है , उसी मन से उस positive thoughts को सोच सोच कर बल देना है और powerful बनाना है ।
देखिये जो चीज़ नहीं हुआ है , उसको सोच कर वर्तमान , भविष्य , ऊर्जा , समय क्यों नष्ट करना ???
सब सोचने पर ही तो है न ।
यह भय आशंका सब सोचने पर है ।
तो इसका उल्टा सोच लीजिये ।
बस सोचना ही तो है ।
एक बार स्वयं को इस मन से हटकर देखिये ।
आप मन नहीं हैं ।
मन आपका है ।
आप नहीं सोच रहे हैं , आपका मन सोच रहा है ।
आपने उससे स्वयं को सम्बद्ध कर दिया है , बस इसलिए ही आप उसके सोचने से सुखी और दुःखी हो रहे हैं ।
यह जो bridge बना है न आपके और मन के बीच में , उस bridge को तोड़ दीजिये ताकि उस मन की विचार या संकल्प विकल्प वाली सेना उस bridge को cross कर आपके पास आ ही न पाए ।
जरा दृष्टा होकर देखिये , मन से अलग होकर कि देखो तो क्या क्या सोच रहा है ये नामुराद ।
तो positive thoughts को पकड़िए केवल जो आपको energise करे ।
विचार ही तो है न मात्र ये ।
इसी ने आपको परेशान किया हुआ है , वह भी उस घटना को लेकर जो अभी हुआ ही नहीं है और पूरी संभावना है कि हो भी न ।
तो क्यों स्वयं को मन का ग़ुलाम करना ।
You are the master of your own thought. Dont let your emotions or thoughts to control or possess you. Let you control your thoughts and take the authority if it.
