Pramod Singh 2014 से पहले भी पूर्व प्रधानमंत्रियों और भारतीय सेना ने अपने राष्ट्र की सुरक्षा, संप्रभुता एवं अखंडता के लिए समय-समय पर कठिन निर्णय लिए हैं-
(1) 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरी सिंह ने पाकिस्तान समर्थित सेनाओं से युद्ध करने के लिए भारतीय सेना को कश्मीर में एयरलिफ्ट करने के बदले में जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय किया।
(2) 21 सितम्बर 1949 को हुई विलय संधि के बाद 15 अक्टूबर 1949 से मणिपुर भारत का अंग बना और 21 जनवरी 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
(3) भारत-भूटान संधि, आज़ादी के तुरंत बाद दोनों देशों के बीच 8 अगस्त 1949 को दार्जिलिंग में संधि हुई थी इसके मुताबिक, रक्षा और विदेश मामलों के संबंध में भूटान भारत पर आश्रित रहेगा यह संधि औपनिवेशिक पृष्ठभूमि में की गई थी, संधि में दोनों देशों ने अपनी भूमि का इस्तेमाल एक-दूसरे के राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध न होने देने की वचनबद्धता दोहराई तथा भारत; भूटान की सैन्य मदद करता रहेगा।
(4) गोआ को 19 दिसंबर 1961 में पुर्तगालीयों से आजाद कराया और 30 मई 1987 को भारतीय संघ के एक राज्य के रूप में गठन किया गया।
(5) जुलाई 1960 में भारत में विलय के एक समझौते के साथ 1 दिसम्बर 1963 को नागालैंड भारत का 16वां पूर्ण राज्य बना।
(6) भारत नें 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान से आजाद कराकर बांग्लादेश को एक स्वतंत्र देश बनाया।
(7) 16 मई 1975 को संवैधानिक रूप से सिक्किम को भारत में विलय के साथ भारतीय संघ के 22वां पूर्ण राज्य के रूप में गठित किया गया।
( 6 जून 1984 को अमृतसर हरिमंदिर साहिब परिसर में आपरेशन ब्लू स्टार स्टार करके हरिमंदिर साहिब परिसर, सहित समूचे पंजाब को खालिस्तानी आतंकवादियों से मुक्त कराया।
(9) अरुणाचल प्रदेश को 20 फरवरी 1987 को भारतीय संघ का 24वां पूर्ण राज्य बनाया गया।
(10) सियाचिन ग्लेशियर को अक्साई चीन से मुक्त कराना।

जानकारी और सूचना के अभाव में इतिहास और भूगोल में कमजोर जिन भाजपा-संघी समर्थकों को ऐसा लगता है कि 2014 के बाद से ही भारतीय सेना मजबूत हुई है या अनुच्छेद 370 जैसे बड़े निर्णय लिए गए हैं तों उन्हें 2014 के पूर्व का भी इतिहास और भूगोल पढ़ना चाहिए, न तो इस देश की सेना कभी कमजोर थी और ना ही देश के पास हथियारों की कमी थी, और ना ही पूर्व के किसी प्रधानमंत्री की नियत में खोट थी, क्योंकि भारत 15 अगस्त 1947 के बाद से एक लोकतांत्रिक देश है, यहां जनता प्रधानमंत्री को शक्ति देती है, नेहरू जी शास्त्री जी, इंदिरा जी एवं राजीव जी को देश की जनता ने पूर्ण बहुमत के रूप में एक शक्तिशाली सरकार का नेतृत्व दिया और इन लोगों ने पूरी दुनिया को भारत की नीति और नियत साफ-साफ जता और दिखा दी, 1990 के बाद से गठबंधन की राजनीति के बाद देश की नीति कमजोर पड़ी इसमें कोई दो राय नहीं है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को 303 सांसदों की शक्ति से हटाया है ना कि अपनी व्यक्तिगत इच्छा के चलते, जनता जिस को शक्ति देती है वह भारत को चलाता है, किंतु लोकतंत्र की मजबूती का लोहा पूरी दुनिया को मनमोहन सिंह ने भी 145 एवं 206 सांसदों के साथ अल्पमत की सरकार के बावजूद मनवा दिया था यही है भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और भारतीय जनता की शक्ति जो यहां के नेताओं को समय-समय पर सरकार के रूप में मिलती आई है।
भविष्य में जिस दिन भारत की जनता भारतीय महासेना को यह शक्ति देगी उस दिन हम पूरी दुनिया को समाजवाद और सामाजिक न्याय किस प्रकार होता है यह दिखा देंगे, भारत की अखंडता और संप्रभुता को खंडित करने वाले हर एक विचार और व्यक्ति को यह बता देंगे कि भारत केवल सीमाओं में बंधा देश नहीं है, भारत को फिर अखंड करेंगे, ज्ञान,शांति एवं समृद्धि के रूप में समाजवाद भारत की अखंडता का प्रमुख अंग बनेगा।
जय भारत जय समाजवाद।
