“भविष्य–मालिका” भविष्य का दर्शन (भाग-6)
लोकतंत्र मर चुका देश में , देश भी जल्दी मर जायेगा ;
लोकतंत्र को जीवित कर लो , भारत भी बच जायेगा ।
लोकतंत्र का जीवन क्या है ? एकमात्र कानून का शासन ;
इसमें सबसे बड़ी है बाधा , भ्रष्टाचार का सर्वत्र है आसन ।
जब तक भ्रष्टाचार रहेगा , कानून का शासन नहीं रहेगा ;
लोकतंत्र मुर्दा ही रहेगा , देश भी जिंदा नहीं बचेगा ।
इसमें धर्म की बात नहीं है , बात नहीं है मजहब की ;
गुरुकुल की भी बात नहीं है , नहीं है कोई मकतब की ।
लोकतंत्र का धर्म कौन सा ? और कौन है इसका मजहब ?
कानून का शासन धर्म है इसका और यही है इसका मजहब ।
पर ये सब कुछ तब ही संभव है, जब होगी अच्छी-सरकार ;
चरित्रवान हों नेता-अफसर , सबसे ज्यादा इसकी दरकार ।
निन्यानबे – प्रतिशत चरित्रहीन हैं , पूरे – पूरे भ्रष्टाचारी ;
स्वार्थ , लोभ , भय , लालच इनको , पूरी तरह दुराचारी ।
अब्बासी-हिंदू इन सबका नेता , यही बुराई की जड़ है ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू ! इसकी तो पूरी बुद्धि ही जड़ है ।
बुद्धि को लकवा मार चुका है , पूरी तरह संवेदनहीन ;
हृदय – सम्राट बनाया उसको , जो है हर सद्गुण से हीन ।
करनी का फल पा रहा है हिंदू , अपनी गलती भोग रहा है ;
अब भी नहीं संभलता हिंदू , शंकराचार्यों को कोस रहा है ।
शत्रु-मित्र का भेद न जाना , शत्रु को अपने गले लगाना ;
जल्दी ही उसको मिट जाना है, छुरा पीठ पर निश्चित खाना ।
भविष्य-मालिका भविष्य का दर्शन,लगातार आगाह कर रही ;
महाविनाश का पूरा संकट है, हिंदू-जनता अनजान रह रही ।
सावधान जो सतर्क नहीं है , उसको निश्चित ही मिटना है ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , किसी को नहीं बचना है ।
इस संकट से वही बचेगा , “विष्णु-कृपा” जो पायेगा ;
धर्मनिष्ठ हो – चरित्रवान हो , “कृपा-पात्र” बन जायेगा ।
अपने सच्चे-धर्म में आओ , जान – माल – सम्मान बचाओ ;
एकमात्र अब यही मार्ग है , धर्म – सनातन में आओ ।
शत्रुबोध तब जागृत होगा , अब्बासी-हिंदू पहचान जाओगे ;
अपने सबसे-बड़े शत्रु को , हिंदू ! तब ही जान पाओगे ।
तेजी से सुधार आयेगा , जब ये नेता मिट जायेगा ;
चुनाव-आयोग का मुंह काला हो , ईवीएम हट जायेगा ।
तब ही अच्छी-सरकार बनेगी , कानून का शासन आयेगा ;
लोकतंत्र फिर जीवित होगा , देश हमारा बच जायेगा ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
