संदीप देव। पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति के उस ‘अवसरवादी चरित्र’ को नंगा कर दिया है, जहाँ विचारधारा का उपयोग केवल सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए किया जाता है। भाजपा ने बंगाल में जो खेल खेला, वह केवल हार-जीत का मामला नहीं है, बल्कि हिंदुओं के साथ एक ऐसा ‘वैचारिक छल’ है जिसने निष्ठाओं और पहचानों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया है!
हिंदुत्व: केवल एक ‘एक्सपायरी डेट’ वाला चुनावी उत्पाद!
चुनाव से पहले बंगाल की हवाओं में ‘घुसपैठिया’ और ‘हिंदू अस्मिता’ का ज़हर घोला गया। प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री तक, हर मंच से ‘हिंदू रक्षक’ होने का स्वांग रचा गया।

चुनाव परिणाम के बाद शुभेंदु अधिकारी ने यहाँ तक कह दिया कि उन्हें “मुसलमानों ने नहीं, केवल हिंदुओं ने वोट दिया है।” लेकिन चुनाव परिणाम आने के महज दो दिन के भीतर आधिकारिक रूप से इसे SC/ST के कारण जीत बताते हुए ‘हिंदुत्व’ के विचार पर ‘बुलडोजर’ चला दिया गया!
भाजपा की डेटा इंजीनियरिंग की भेंट चढ़ गये 57 लाख हिंदू!
रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा SIR ( Special Intensive Revision) में हटाए गए 91 लाख नामों में से 34% मुस्लिम मतदाता थे। इसी तरह कुल हटाए गए नाम (लगभग 90.66 लाख) में से हिंदू मतदाताओं की संख्या 57.47 लाख है, जो यह कुल हटाए गये मतदाताओं का लगभग 63.4% है। यदि हम इसे राज्य की कुल जनसंख्या के अनुपात में देखें, तो बंगाल में हिंदुओं की जनसंख्या लगभग 70% है, और कुल हटाए गये मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी 63% के करीब है। आज उन 57 लाख से अधिक हिंदुओं का क्या हुआ जिनके नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए? इस पर भाजपा-संघ का पूरा ‘ईको सिस्टम’ मौन है!
भाजपा-संघ ‘ईको सिस्टम’ ने 34% मुस्लिमों के विलोपन को तो “घुसपैठियों की सफाई” बताकर हिंदुओं को धोखे में रखा और जश्न मनाने का स्वांग रच हिंदुओं का वोट लिया, लेकिन 57.47 लाख हिंदू मतदाताओं की ‘लोकतांत्रिक हत्या’ पर रहस्यमयी चुप्पी साध ली! सत्य यह है कि भाजपा के लिए ‘हिंदू’ केवल तब तक पवित्र है जब तक वह ईवीएम का बटन दबाने लायक है; यदि वह ‘डेटा इंजीनियरिंग’ की भेंट चढ़ जाए, तो उसे ‘कोलेटरल डैमेज’ मानकर भुला देना ही भाजपाई-संघी नियति है। नाथूराम गोडसे से लेकर बलराज मधोक तक, अपनों को भुलाने और उनसे पल्ला झाड़ने में भाजपा हमेशा आगे रही है!
सवर्ण-मुस्लिम गठजोड़: मंडल का ‘सुविधाजनक’ प्रहार!
जैसे ही सत्ता हाथ आई, भाजपा के विचारकों ने ‘हिंदुत्व’ के झंडे को लपेटकर फेंक दिया और ‘जाति’ का हथियार निकाल लिया। दिलीप मंडल जैसे लोग अब इस जीत को “नेहरूवादी-सवर्ण-मुस्लिम गठजोड़” के अंत के रूप में पेश कर रहे हैं।

यह विमर्श कि “कांग्रेस, वामपंथ और टीएमसी ने सवर्ण हिंदुओं और मुस्लिमों का अपवित्र गठबंधन बनाकर दलितों को हाशिए पर रखा”, भाजपा की उस अवसरवादिता का प्रमाण है जो हारने पर ‘हिंदुत्व’ चिल्लाती है और जीतने पर ‘जाति’ का ढोल पीटती है। दिलीप मंडल का यह तर्क कि “कोलकाता में बाबा साहेब अंबेडकर की एक भव्य मूर्ति तक नहीं है,” टीएमसी और वामपंथ के ‘भद्रलोक’ वर्चस्व पर एक तीखा प्रहार तो है, लेकिन यह सवाल भी खड़े करता है कि क्या भाजपा अब अंबेडकर के नाम पर अपनी ‘हिंदुत्व की छवि’ को पोंछने की कोशिश कर रही है जिसने उसे आज तक सत्ता दिलाया है?

‘अंबेडकर कार्ड’ की सांख्यिकीय बाजीगरी
भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल से जारी आंकड़े इस ‘न्यू सोशल इंजीनियरिंग’ के घिनौनेपन को उजागर करते हैं।
* भाजपा चिल्ला रही है कि उसने बंगाल की 84 आरक्षित सीटों में से 67 (79.76%) पर जीत दर्ज की।
* भाजपा द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में, BJP ने 68 में से 51 SC सीटें (75%) और सभी 16 ST सीटें (100%) जीतीं, इस तरह उसने 84 SC/ST आरक्षित सीटों में से 67 सीटें (79.76%) हासिल कर लीं।
* भाजपा के आंकड़ों के मुताबिक असम में NDA ने 9 में से 8 SC सीटें (89%) जीतीं और सभी 19 ST सीटें (100%) अपने नाम कर लीं।
* भाजपा के विचारक दिलीप मंडल चिल्ला रहे हैं कि बंगाल में जिन सीटों पर दलित 30% से अधिक हैं, वहां भाजपा की जीत का प्रतिशत 83% रहा।


यह डेटा यह सिद्ध करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है कि भाजपा अब ‘वंचितों की पार्टी’ है। लेकिन यह कैसी पार्टी है जिसके गठन के लिए 57 लाख से अधिक हिंदुओं के मताधिकार की बलि दे दी गई? कहां गया “सबका विकास, सबका विश्वास” का वह खोखला नारा? क्या ‘सब’ में हिंदुओं की ‘सामान्य जातियां’ नहीं आती हैं? जहाँ चुनाव पूर्व ‘जय श्री राम’ का नारा एक युद्धघोष था, वहां चुनाव पश्चात ‘जय भीम’ का मुखौटा केवल सत्ता को जातिगत सुरक्षा प्रदान करने की एक चाल है।
भाजपा की जीत में अनारक्षित वर्ग अर्थात् सामान्य जातियों की भूमिका!

जहाँ दिलीप मंडल जैसे विचारक इसे बंगाल में “सवर्ण वर्चस्व का अंत” कह रहे हैं, वहीं आंकड़े दर्शाते हैं कि भाजपा की जीत में अनारक्षित सामान्य सीटों (UR-Unreserved/General)की बड़ी भूमिका रही है।
सीट वृद्धि का तुलनात्मक चार्ट (2021 vs 2026)
| श्रेणी | कुल सीटें | 2021 (BJP) | 2026 (BJP) | सीट वृद्धि (संख्या) | वृद्धि (%) |
| SC (अनुसूचित जाति) | 68 | 29 | 51 | +22 | 75.86% |
| ST (अनुसूचित जनजाति) | 16 | 06 | 16 | +10 | 166.67% |
| UR (अनारक्षित/सामान्य) | 210 | 42 | 140 | +98 | 233.33% |
| कुल | 294 | 77 | 207 | +130 | 168.83% |
यदि चार्ट में दिए इन आंकड़ों को देखें तो SC/ST सीटों में औसत वृद्धि जहां 91.42% है, वहीं UR सीटों में वृद्धि दर 233.33% के आसपास है। आंकड़े साफ बता रहे हैं कि भाजपा की सबसे बड़ी वृद्धि प्रतिशत UR सीटों से आई है। हां, स्ट्राइक रेट के आधार पर दिलीप मंडल जैसे जातिवादी इसका आकलन यदि करेंगे तो SC/ST सीटों की बढ़त अधिक दिखेगी और यही कारण है कि भाजपा का आधिकारिक हैंडल और आंबेडकरवादी दिलीप मंडल जैसे मोदी सरकार के ‘नव-प्रवक्ता’ सामान्य जातियों की भूमिका को नगण्य ठहराने में जुट चुके हैं और सवर्णों को मुस्लिम से जोड़ कर बंगाल में उसके अंत की घोषणा कर रहे हैं।
भाजपा द्वारा OBC के प्रभाव को भी नकारने की कोशिश!
भाजपा के आधिकारिक हैंडल और दिलीप मंडल जैसे आंबेडकरवादी प्रवक्ता सामान्य जातियों के प्रभाव के अंत की घोषणा तो कर ही चुके हैं, वो चुपके से हिंदू OBC वर्ग के प्रभाव को भी नकारने के प्रयास में जुटे हैं। आइए स्ट्राइक रेट के आधार पर इस गणित को समझते हैं। कोई शक नहीं कि भाजपा ने 2026 में आरक्षित सीटों (SC+ST) पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
भाजपा ने कुल 84 आरक्षित सीटों में से 67 जीतीं, जो 79.76% का स्ट्राइक रेट है। वहीं, UR सीटों पर भाजपा ने 210 में से 140 सीटें जीतीं, जो 66.6% का स्ट्राइक रेट बनता है। बेस इफेक्ट के रूप में देखें तो 2021 में भाजपा के पास UR की 42 सीटें थीं, इसलिए 140 तक पहुँचने पर प्रतिशत उछाल बहुत बड़ा है। चूँकि आरक्षित सीटों पर भाजपा 2021 में भी मजबूत थी, इसलिए वहां वृद्धि की ‘गुंजाइश’ प्रतिशत के रूप में कम रह गई थी। इसके बावजूद संख्या के लिहाज से 140 सीटें अनारक्षित जगह से आई हैं, जिसने भाजपा को बहुमत के पार पहुंचाया है, अन्यथा सीटें कम रह जाती तो इस SC/ST स्ट्राइक रेट की प्रतिशतता का कोई मतलब नहीं रह जाता और बंगाल में सरकार बनाने से भाजपा पीछे रह जाती।

इसलिए बंगाल में भाजपा की जीत में ‘अनारक्षित’ सीटों की बड़ी भूमिका से समझदार लोग इनकार नहीं कर सकते हैं, जैसा कि संघ-भाजपा के ‘नव-विचारक’ दिलीप मंडल जैसे जातिवादी और भाजपा का आधिकारिक हैंडल इसे नकारने की कोशिश में चुनाव परिणाम के दूसरे दिन से ही जुट गया है!
अब इसमें OBC की महत्वपूर्ण भूमिका को समझते हैं। असल मेंपश्चिम बंगाल की अधिकांश ‘अनारक्षित’ (UR) सीटों पर OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) मतदाताओं का भी वर्चस्व है। भाजपा ने इन सीटों पर ओबीसी कार्ड और ‘सबर एल्गोरिदम’ (वोटर लिस्ट संशोधन) के जरिए बड़ी बढ़त हासिल की। UR सीटों पर भाजपा की जीत का मुख्य आधार हिंदू मतदाताओं का एकमुश्त ध्रुवीकरण था, जिसमें सामान्य जाति के साथ-साथ ओबीसी और शहरी दलित भी शामिल थे। यह ध्रुवीकरण “टीएमसी आ जाएगी तो मुस्लिम जीना मुहाल कर देंगे”- का डर दिखाकर ‘हिंदुत्व’ के आधार पर किया गया था, जिससे चुनाव जीतते ही भाजपा पल्ला झाड़ने की कोशिश में जुट चुकी है।
विचारधारा का ‘यूटिलिटेरियन’ कत्ल!
UGC कानून के बाद हिंदू सामान्य जाति समाज की मुखर आवाज भाजपा और मोदी सरकार की ‘हिसाब चुकता नीति’ या सवर्ण प्रभाव को कम करके दिखाने जैसी ‘धोखाधड़ी’ के खिलाफ एक नागरिक विद्रोह है। यह उस ‘सिस्टम’ के खिलाफ आवाज़ है जो चुनाव से पहले ‘हिंदू’ को डराता है और परिणाम आने पर उसे ‘जाति’ के खांचों में बांट देता है।
भाजपा ने सिद्ध कर दिया है कि उसके लिए ‘हिंदुत्व’ केवल एक ‘डिस्पोजेबल’ औजार है—इस्तेमाल करो और फेंक दो। टीएमसी को ‘सवर्ण वर्चस्व’ वाली और ‘दलित विरोधी’ पार्टी बताकर एवं खुद को ‘अंबेडकरवादी’ घोषित कर भाजपा ने जो ‘इंजीनियर्ड ध्रुवीकरण’ किया है, वह लोकतंत्र की सबसे बड़ी त्रासदी है।
मेरी संपादकीय टिप्पणी:
जहाँ चुनाव से पूर्व ‘घुसपैठियों’ के नारों के बीच मुस्लिमों से अधिक हिंदुओं का वोट काटा गया, जय श्रीराम का नारा लगा कर ‘छद्म हिंदुत्व’ का कार्ड खेला गया और चुनाव जीतते के मजह दो दिन बाद ही आधाकारिक रूप से ‘जय भीम’ का नैरेटिव उछाल कर इसे केवल SC/ST की जीत बताया गया, असल में वह जनादेश नहीं, बल्कि ‘छल’ है, जो हिंदुओं के साथ भाजपा लगातार कर रही है। बंगाल 2026 की जीत भाजपा के ‘वैचारिक गिरगिट-रुप’ का वह स्मारक है, जो भविष्य के भारत को यह चेतावनी दे रहा है कि सत्ता के लिए यहाँ किसी भी ‘पहचान’ की बलि दी जा सकती है!
आज ‘हिंदुत्व’ के ‘पहचान’ की बली दी गई है, भाजपा को अवसर मिले तो वह भविष्य में SC/ST/OBC की ‘पहचान’ की भी बली दे सकती है और पसमंदावादी- क्रिश्चियन पहचान का ‘बुर्का’ ओढ़ सकती है! OBC आरक्षण में मुस्लिमों को लाभ देकर, ST आरक्षण में कूकी क्रिश्चियनों (मणिपुर में) को लाभ देकर और SC/ST आरक्षण में मुस्लिम-ईसाई आरक्षण की राह तलाशने के लिए ‘जस्टिस बालाकृष्णन कमेटी’ का गठन कर उसने इसकी शुरुआत तो कर ही दी है!

अवसरवादी भाजपा से भारत का कोई भी समाज व वर्ग सुरक्षित नहीं है! समाज और देश के अंदर आपसी वैमनस्यता व घृणा पैदा करना, हिंदू समाज को जातियों में बांटना और चुनाव के समय ‘घुसपैठ’ आदि की आड़ में ‘छद्म मुस्लिम विरोध’ दर्शा कर हिंदू जनता को भ्रमित करते हुए सत्ता हासिल करना ही भाजपा का एक मात्र मकसद है।
सच तो यह है कि हर राज्य चुनाव प्रचार में ‘घुसपैठियों को निकालेंगे’ का नारा लगाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी 13 साल की सत्ता में 13,000 घुसपैठिए भी बाहर नहीं निकाले हैं, जबकि अपनी 10 साल की सत्ता में कांग्रेस की मनमोहन सरकार ने 80,000 से अधिक घुसपैठियों को बाहर निकाला था। फिर भी मीडिया-सोशल मीडिया पर कब्जे और उसके जरिए प्रोपोगेंडा फैला कर भाजपा ने हिंदू समाज हितैषी का मुखौटा धारण कर रखा है और उसी समाज को जातियों में बांट कर अपनी सत्ता का खेल खेल रही है!
हिंदुत्व से किनारा कर, केवल ‘जय भीम’ को बंगाल जीत का श्रेय देने पर सोशल मीडिया उबल पड़ा। हारकर भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल से गुरुवार 7 मई 2026 को रात्रि 10.50 पर एक ‘सबका विश्वास’ टाइप कामचलाऊ पोस्ट किया गया, जिसमें लिखा गया कि “बंगाल में हर वर्ग ने दिया भाजपा को प्रचंड समर्थन! ये ऐतिहासिक जीत… भाजपा का मंत्र- ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ का परिणाम है।” फिर भी इस पोस्ट में सामान्य जाति और ओबीसी वर्ग को उस तरह श्रेय नहीं दिया गया, जैसे कि SC/ST को दिया गया और उनके समर्थन में दिलीप मंडल से सर्वणों को मुस्लिमों से जोड़ कर आलोचना कराई गई! भाजपा का चरित्र अब एक हिंदुवादी की जगह, जातिवादी-पसमंदावादी पार्टी की बन चुकी है और वह इसे बार-बार साबित भी कर रही है।

34 lakh व्हाट्सएप ग्रुप्स पर प्रोपेगैंडा चलाया जा रहा है कि बंगाल में BJP के जीतते ही घुसपैठिये घर छोड़कर भाग रहे हैं, और ब्रेन डेड हिन्दू इसे मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं। मैंने ऐसे ही एक को कहा कि चुनौती है 5 साल में 5 लाख घुसपैठिये भी मोदी निकालकर बता दें।
जीतने के बाद सवर्णों को लात पडी़ तो मंडल बहुत खुश हुआ उसे नहीं पता लात तो तुझे भी पड़ेगी!!सगा तो मुस्लिम और क्रिश्चियन ही है!!!