By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
India Speak DailyIndia Speak Daily
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
    • मुद्दा
    • न्यायपालिका
    • अपराध
    • भ्रष्टाचार
    • जन समस्या
    • Events and Activities
    • Health Report
    • ISD Radio
    • ISD videos
    • English content
  • मीडिया
    • खोजी आलेख
    • मेनस्ट्रीम जर्नलिज्म
    • डिजिटल मीडिया
    • फिफ्थ कॉलम
    • फेक न्यूज भंडाफोड़
    • कानाफूसी
  • वैचारिकी
    • संघवाद
    • अस्मितावाद
    • जातिवाद
    • पंचमक्कारवाद
    • व्यक्तिवाद
    • समाजशास्त्र
    • राजनीतिक व्यक्तित्व
    • संपादकीय
  • इतिहास
    • स्वर्णिम भारत
    • गुलाम भारत
    • आजाद भारत
    • विश्व इतिहास
    • अनोखा इतिहास
  • धर्म
    • सनातन हिंदू धर्म
    • दर्शन और संप्रदाय
    • वास्तु एवं ज्योतिष
    • अब्राहमिक मजहब
    • उपदेश एवं उपदेशक
  • ब्लॉग
    • मूवी ज़ोन
    • भाषा और साहित्य
    • स्वयंसेवी प्रयास
    • कुछ नया
    • पर्यटन
    • नारी जगत
    • पुस्तकें
    • प्रेरक व्यक्तित्व
    • AI | Tech & Careers
    • SDEO’s Story
    • Sponsored Post
  • Members Only
  • JOIN US / LOGIN
Reading: ‘हिंदू कार्ड’ से ‘अंबेडकर कार्ड’ तक: भाजपा का वैचारिक ‘गिरगिट-रूप’!
Share
Notification
Latest News
यूपी की वोटर लिस्ट में 16.18 लाख ‘रहस्यमयी’ मतदाता: चुनाव आयोग ने छिपाए नाम, कानून को ताक पर रखकर हुआ खेल?
खोजी आलेख
एपिसोड-3: “हज़रत पैगंबर के अनुयायियों ने सोमनाथ की मूर्तियों के टुकड़े कर शूद्रों को मुक्त कराया”—‘गुलामगिरी’ के इस संवाद से क्या सिद्ध करना चाहते थे फुले?
Members Only SDEO's Story जातिवाद
सिंडिकेट का चक्रव्यूह और अरबों का बाज़ार: केली कुंज से बेलवन तक प्रेमानंद महाराज के इर्द-गिर्द क्या चल रहा है?
अपराध उपदेश एवं उपदेशक खोजी आलेख
संपादकीय…सुप्रीम कोर्ट के नाम पर चुनाव आयोग का ‘सफेद झूठ’ बेनकाब: फॉर्म-6 के फर्जीवाड़े से लेकर 13 करोड़ वोटों की डकैती तक का कच्चा-चिट्ठा!
संपादकीय
बलदाऊ गो शाला में आयोजित गो-महोत्सव: मुख्य अतिथि का शास्त्रीय उद्बोधन, अर्थशास्त्र पर तीखे सवाल और गो-सेवा का संकल्प!
Events and Activities
Aa
Aa
India Speak DailyIndia Speak Daily
  • ISD Radio
  • ISD Videos
  • JOIN US / LOGIN
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
    • मुद्दा
    • न्यायपालिका
    • अपराध
    • भ्रष्टाचार
    • जन समस्या
    • Events and Activities
    • Health Report
    • ISD Radio
    • ISD videos
    • English content
  • मीडिया
    • खोजी आलेख
    • मेनस्ट्रीम जर्नलिज्म
    • डिजिटल मीडिया
    • फिफ्थ कॉलम
    • फेक न्यूज भंडाफोड़
    • कानाफूसी
  • वैचारिकी
    • संघवाद
    • अस्मितावाद
    • जातिवाद
    • पंचमक्कारवाद
    • व्यक्तिवाद
    • समाजशास्त्र
    • राजनीतिक व्यक्तित्व
    • संपादकीय
  • इतिहास
    • स्वर्णिम भारत
    • गुलाम भारत
    • आजाद भारत
    • विश्व इतिहास
    • अनोखा इतिहास
  • धर्म
    • सनातन हिंदू धर्म
    • दर्शन और संप्रदाय
    • वास्तु एवं ज्योतिष
    • अब्राहमिक मजहब
    • उपदेश एवं उपदेशक
  • ब्लॉग
    • मूवी ज़ोन
    • भाषा और साहित्य
    • स्वयंसेवी प्रयास
    • कुछ नया
    • पर्यटन
    • नारी जगत
    • पुस्तकें
    • प्रेरक व्यक्तित्व
    • AI | Tech & Careers
    • SDEO’s Story
    • Sponsored Post
  • Members Only
  • JOIN US / LOGIN
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Website Design & Developed By: WebNet Creatives
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
India Speak Daily > Blog > SDEO's Story > ‘हिंदू कार्ड’ से ‘अंबेडकर कार्ड’ तक: भाजपा का वैचारिक ‘गिरगिट-रूप’!
SDEO's Storyमुद्दा

‘हिंदू कार्ड’ से ‘अंबेडकर कार्ड’ तक: भाजपा का वैचारिक ‘गिरगिट-रूप’!

Ssandeep Deo
By Ssandeep Deo 15 Min Read
Share
15 Min Read
SHARE

संदीप देव। पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति के उस ‘अवसरवादी चरित्र’ को नंगा कर दिया है, जहाँ विचारधारा का उपयोग केवल सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए किया जाता है। भाजपा ने बंगाल में जो खेल खेला, वह केवल हार-जीत का मामला नहीं है, बल्कि हिंदुओं के साथ एक ऐसा ‘वैचारिक छल’ है जिसने निष्ठाओं और पहचानों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया है!

हिंदुत्व: केवल एक ‘एक्सपायरी डेट’ वाला चुनावी उत्पाद!

चुनाव से पहले बंगाल की हवाओं में ‘घुसपैठिया’ और ‘हिंदू अस्मिता’ का ज़हर घोला गया। प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री तक, हर मंच से ‘हिंदू रक्षक’ होने का स्वांग रचा गया।

29 अप्रैल को द्वितीय चरण का जब चुनाव चल रहा था तो काशी के विश्वनाथ मंदिर में हिंदू भाव-भंगिमा धारण कर मोदी मीडिया का उपयोग करते हुए बंगाल चुनाव को प्रभावित कर रहे थे! दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, PM नरेंद्र मोदी अब तक 14 बार तीर्थ स्थलों पर उस–उस दिन गए, जब देश में कहीं न कहीं वोट डाले जा रहे थे!

चुनाव परिणाम के बाद शुभेंदु अधिकारी ने यहाँ तक कह दिया कि उन्हें “मुसलमानों ने नहीं, केवल हिंदुओं ने वोट दिया है।” लेकिन चुनाव परिणाम आने के महज दो दिन के भीतर आधिकारिक रूप से इसे SC/ST के कारण जीत बताते हुए ‘हिंदुत्व’ के विचार पर ‘बुलडोजर’ चला दिया गया!

More Read

एपिसोड-3: “हज़रत पैगंबर के अनुयायियों ने सोमनाथ की मूर्तियों के टुकड़े कर शूद्रों को मुक्त कराया”—‘गुलामगिरी’ के इस संवाद से क्या सिद्ध करना चाहते थे फुले?
एपिसोड-2: मैक्स मूलर का नस्लवाद और ज्योतिराव फुले: अपने ही पुरखों को विदेशी हमलावर बताकर समाज को बांटने का औपनिवेशिक खेल!
आस्था का आवरण, मुनाफे का सिंडिकेट: भाजपा राज में बीफ इंडस्ट्री का कॉर्पोरेटाइजेशन और सत्ता की सांठगांठ!
एपिसोड-1: NCERT के जरिए बच्चों के मानस में औपनिवेशिक जहर: मिशनरी एजेंडा और फुले का विखंडनवादी विमर्श!

भाजपा की डेटा इंजीनियरिंग की भेंट चढ़ गये 57 लाख हिंदू!

रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा SIR ( Special Intensive Revision) में हटाए गए 91 लाख नामों में से 34% मुस्लिम मतदाता थे। इसी तरह कुल हटाए गए नाम (लगभग 90.66 लाख) में से हिंदू मतदाताओं की संख्या 57.47 लाख है, जो यह कुल हटाए गये मतदाताओं का लगभग 63.4% है। यदि हम इसे राज्य की कुल जनसंख्या के अनुपात में देखें, तो बंगाल में हिंदुओं की जनसंख्या लगभग 70% है, और कुल हटाए गये मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी 63% के करीब है। आज उन 57 लाख से अधिक हिंदुओं का क्या हुआ जिनके नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए? इस पर भाजपा-संघ का पूरा ‘ईको सिस्टम’ मौन है!

भाजपा-संघ ‘ईको सिस्टम’ ने 34% मुस्लिमों के विलोपन को तो “घुसपैठियों की सफाई” बताकर हिंदुओं को धोखे में रखा और जश्न मनाने का स्वांग रच हिंदुओं का वोट लिया, लेकिन 57.47 लाख हिंदू मतदाताओं की ‘लोकतांत्रिक हत्या’ पर रहस्यमयी चुप्पी साध ली! सत्य यह है कि भाजपा के लिए ‘हिंदू’ केवल तब तक पवित्र है जब तक वह ईवीएम का बटन दबाने लायक है; यदि वह ‘डेटा इंजीनियरिंग’ की भेंट चढ़ जाए, तो उसे ‘कोलेटरल डैमेज’ मानकर भुला देना ही भाजपाई-संघी नियति है। नाथूराम गोडसे से लेकर बलराज मधोक तक, अपनों को भुलाने और उनसे पल्ला झाड़ने में भाजपा हमेशा आगे रही है!

सवर्ण-मुस्लिम गठजोड़: मंडल का ‘सुविधाजनक’ प्रहार!

जैसे ही सत्ता हाथ आई, भाजपा के विचारकों ने ‘हिंदुत्व’ के झंडे को लपेटकर फेंक दिया और ‘जाति’ का हथियार निकाल लिया। दिलीप मंडल जैसे लोग अब इस जीत को “नेहरूवादी-सवर्ण-मुस्लिम गठजोड़” के अंत के रूप में पेश कर रहे हैं।

यह विमर्श कि “कांग्रेस, वामपंथ और टीएमसी ने सवर्ण हिंदुओं और मुस्लिमों का अपवित्र गठबंधन बनाकर दलितों को हाशिए पर रखा”, भाजपा की उस अवसरवादिता का प्रमाण है जो हारने पर ‘हिंदुत्व’ चिल्लाती है और जीतने पर ‘जाति’ का ढोल पीटती है। दिलीप मंडल का यह तर्क कि “कोलकाता में बाबा साहेब अंबेडकर की एक भव्य मूर्ति तक नहीं है,” टीएमसी और वामपंथ के ‘भद्रलोक’ वर्चस्व पर एक तीखा प्रहार तो है, लेकिन यह सवाल भी खड़े करता है कि क्या भाजपा अब अंबेडकर के नाम पर अपनी ‘हिंदुत्व की छवि’ को पोंछने की कोशिश कर रही है जिसने उसे आज तक सत्ता दिलाया है?

‘अंबेडकर कार्ड’ की सांख्यिकीय बाजीगरी

भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल से जारी आंकड़े इस ‘न्यू सोशल इंजीनियरिंग’ के घिनौनेपन को उजागर करते हैं।

* भाजपा चिल्ला रही है कि उसने बंगाल की 84  आरक्षित सीटों में से 67 (79.76%) पर जीत दर्ज की।

* भाजपा द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में, BJP ने 68 में से 51 SC सीटें (75%) और सभी 16 ST सीटें (100%) जीतीं, इस तरह उसने 84 SC/ST आरक्षित सीटों में से 67 सीटें (79.76%) हासिल कर लीं।

* भाजपा के आंकड़ों के मुताबिक असम में NDA ने 9 में से 8 SC सीटें (89%) जीतीं और सभी 19 ST सीटें (100%) अपने नाम कर लीं।

* भाजपा के विचारक दिलीप मंडल चिल्ला रहे हैं कि बंगाल में जिन सीटों पर दलित 30% से अधिक हैं, वहां भाजपा की जीत का प्रतिशत 83% रहा।

यह डेटा यह सिद्ध करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है कि भाजपा अब ‘वंचितों की पार्टी’ है। लेकिन यह कैसी पार्टी है जिसके गठन के लिए 57 लाख से अधिक हिंदुओं के मताधिकार की बलि दे दी गई? कहां गया “सबका विकास, सबका विश्वास” का वह खोखला नारा? क्या ‘सब’ में हिंदुओं की ‘सामान्य जातियां’ नहीं आती हैं? जहाँ चुनाव पूर्व ‘जय श्री राम’ का नारा एक युद्धघोष था, वहां चुनाव पश्चात ‘जय भीम’ का मुखौटा केवल सत्ता को जातिगत सुरक्षा प्रदान करने की एक चाल है।

भाजपा की जीत में अनारक्षित वर्ग अर्थात् सामान्य जातियों की भूमिका!

The key SC seats where BJP won by massive margins👇

Yon can see that 65% population in these seats are non-SC hindus.

So all hindus contributed for BJP's win, across all seats.

Remember:
SC reserved seats doesn't mean SC dominant areas. https://t.co/LL56qfb65v pic.twitter.com/7mEog6BK6V

— Dr. Neha Das (@neha_laldas) May 8, 2026

जहाँ दिलीप मंडल जैसे विचारक इसे  बंगाल में “सवर्ण वर्चस्व का अंत” कह रहे हैं, वहीं आंकड़े दर्शाते हैं कि भाजपा की जीत में अनारक्षित सामान्य सीटों (UR-Unreserved/General)की बड़ी भूमिका रही है।

सीट वृद्धि का तुलनात्मक चार्ट (2021 vs 2026)

श्रेणीकुल सीटें2021 (BJP)2026 (BJP)सीट वृद्धि (संख्या)वृद्धि (%)
SC (अनुसूचित जाति)682951+2275.86%
ST (अनुसूचित जनजाति)160616+10166.67%
UR (अनारक्षित/सामान्य)21042140+98233.33%
कुल29477207+130168.83%

यदि चार्ट में दिए इन आंकड़ों को देखें तो SC/ST सीटों में औसत वृद्धि जहां 91.42% है, वहीं UR सीटों में वृद्धि दर 233.33% के आसपास है। आंकड़े साफ बता रहे हैं कि भाजपा की सबसे बड़ी वृद्धि प्रतिशत UR सीटों से आई है। हां, स्ट्राइक रेट के आधार पर दिलीप मंडल जैसे जातिवादी इसका आकलन यदि करेंगे तो SC/ST सीटों की बढ़त अधिक दिखेगी और यही कारण है कि भाजपा का आधिकारिक हैंडल और आंबेडकरवादी दिलीप मंडल जैसे मोदी सरकार के ‘नव-प्रवक्ता’ सामान्य जातियों की भूमिका को नगण्य ठहराने में जुट चुके हैं और सवर्णों को मुस्लिम से जोड़ कर बंगाल में उसके अंत की घोषणा कर रहे हैं।

भाजपा द्वारा OBC के प्रभाव को भी नकारने की कोशिश!

भाजपा के आधिकारिक हैंडल और दिलीप मंडल जैसे आंबेडकरवादी प्रवक्ता सामान्य जातियों के प्रभाव के अंत की घोषणा तो कर ही चुके हैं, वो चुपके से हिंदू OBC वर्ग के प्रभाव को भी नकारने के प्रयास में जुटे हैं। आइए स्ट्राइक रेट के आधार पर इस गणित को समझते हैं। कोई शक नहीं कि भाजपा ने 2026 में आरक्षित सीटों (SC+ST) पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

After Mamata Banerjee insulted India’s first tribal President Droupadi Murmu, skipping her welcome, shifting the Santhal conference venue at the last minute, and leaving her unattended, the people of Bengal and Assam delivered a thundering reply!

In Assam, the 𝐍𝐃𝐀… pic.twitter.com/z8Cur0vW0X

— BJP (@BJP4India) May 6, 2026

भाजपा ने कुल 84 आरक्षित सीटों में से 67 जीतीं, जो 79.76% का स्ट्राइक रेट है। वहीं, UR सीटों पर भाजपा ने 210 में से 140 सीटें जीतीं, जो 66.6% का स्ट्राइक रेट बनता है। बेस इफेक्ट के रूप में देखें तो 2021 में भाजपा के पास UR की 42 सीटें थीं, इसलिए 140 तक पहुँचने पर प्रतिशत उछाल बहुत बड़ा है। चूँकि आरक्षित सीटों पर भाजपा 2021 में भी मजबूत थी, इसलिए वहां वृद्धि की ‘गुंजाइश’ प्रतिशत के रूप में कम रह गई थी। इसके बावजूद संख्या के लिहाज से 140 सीटें अनारक्षित जगह से आई हैं, जिसने भाजपा को बहुमत के पार पहुंचाया है, अन्यथा सीटें कम रह जाती तो इस SC/ST स्ट्राइक रेट की प्रतिशतता का कोई मतलब नहीं रह जाता और बंगाल में सरकार बनाने से भाजपा पीछे रह जाती।

इसलिए बंगाल में भाजपा की जीत में ‘अनारक्षित’ सीटों की बड़ी भूमिका से समझदार लोग इनकार नहीं कर सकते हैं, जैसा कि संघ-भाजपा के ‘नव-विचारक’ दिलीप मंडल जैसे जातिवादी और भाजपा का आधिकारिक हैंडल इसे नकारने की कोशिश में चुनाव परिणाम के दूसरे दिन से ही जुट गया है!

अब इसमें OBC की महत्वपूर्ण भूमिका को समझते हैं। असल मेंपश्चिम बंगाल की अधिकांश ‘अनारक्षित’ (UR) सीटों पर OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) मतदाताओं का भी वर्चस्व है। भाजपा ने इन सीटों पर ओबीसी कार्ड और ‘सबर एल्गोरिदम’ (वोटर लिस्ट संशोधन) के जरिए बड़ी बढ़त हासिल की। UR सीटों पर भाजपा की जीत का मुख्य आधार हिंदू मतदाताओं का एकमुश्त ध्रुवीकरण था, जिसमें सामान्य जाति के साथ-साथ ओबीसी और शहरी दलित भी शामिल थे। यह ध्रुवीकरण “टीएमसी आ जाएगी तो मुस्लिम जीना मुहाल कर देंगे”- का डर दिखाकर ‘हिंदुत्व’ के आधार पर किया गया था, जिससे चुनाव जीतते ही भाजपा पल्ला झाड़ने की कोशिश में जुट चुकी है।

विचारधारा का ‘यूटिलिटेरियन’ कत्ल!

UGC कानून के बाद हिंदू सामान्य जाति समाज की मुखर आवाज भाजपा और मोदी सरकार की ‘हिसाब चुकता नीति’ या सवर्ण प्रभाव को कम करके दिखाने जैसी ‘धोखाधड़ी’ के खिलाफ एक नागरिक विद्रोह है। यह उस ‘सिस्टम’ के खिलाफ आवाज़ है जो चुनाव से पहले ‘हिंदू’ को डराता है और परिणाम आने पर उसे ‘जाति’ के खांचों में बांट देता है।

भाजपा ने सिद्ध कर दिया है कि उसके लिए ‘हिंदुत्व’ केवल एक ‘डिस्पोजेबल’ औजार है—इस्तेमाल करो और फेंक दो। टीएमसी को ‘सवर्ण वर्चस्व’ वाली और ‘दलित विरोधी’ पार्टी बताकर एवं खुद को ‘अंबेडकरवादी’ घोषित कर भाजपा ने जो ‘इंजीनियर्ड ध्रुवीकरण’ किया है, वह लोकतंत्र की सबसे बड़ी त्रासदी है।

मेरी संपादकीय टिप्पणी:

जहाँ चुनाव से पूर्व ‘घुसपैठियों’ के नारों के बीच मुस्लिमों से अधिक हिंदुओं का वोट काटा गया, जय श्रीराम का नारा लगा कर ‘छद्म हिंदुत्व’ का कार्ड खेला गया और चुनाव जीतते के मजह दो दिन बाद ही आधाकारिक रूप से ‘जय भीम’ का नैरेटिव उछाल कर इसे केवल SC/ST की जीत बताया गया, असल में वह जनादेश नहीं, बल्कि ‘छल’ है, जो हिंदुओं के साथ भाजपा लगातार कर रही है। बंगाल 2026 की जीत भाजपा के ‘वैचारिक गिरगिट-रुप’ का वह स्मारक है, जो भविष्य के भारत को यह चेतावनी दे रहा है कि सत्ता के लिए यहाँ किसी भी ‘पहचान’ की बलि दी जा सकती है!

आज ‘हिंदुत्व’ के ‘पहचान’ की बली दी गई है, भाजपा को अवसर मिले तो वह भविष्य में SC/ST/OBC की ‘पहचान’ की भी बली दे सकती है और पसमंदावादी- क्रिश्चियन पहचान का ‘बुर्का’ ओढ़ सकती है! OBC आरक्षण में मुस्लिमों को लाभ देकर, ST आरक्षण में कूकी क्रिश्चियनों (मणिपुर में) को लाभ देकर और SC/ST आरक्षण में मुस्लिम-ईसाई आरक्षण की राह तलाशने के लिए ‘जस्टिस बालाकृष्णन कमेटी’ का गठन कर उसने इसकी शुरुआत तो कर ही दी है!

अवसरवादी भाजपा से भारत का कोई भी समाज व वर्ग सुरक्षित नहीं है! समाज और देश के अंदर आपसी वैमनस्यता व घृणा पैदा करना, हिंदू समाज को जातियों में बांटना और चुनाव के समय ‘घुसपैठ’ आदि की आड़ में ‘छद्म मुस्लिम विरोध’ दर्शा कर हिंदू जनता को भ्रमित करते हुए सत्ता हासिल करना ही भाजपा का एक मात्र मकसद है।

सच तो यह है कि हर राज्य चुनाव प्रचार में ‘घुसपैठियों को निकालेंगे’ का नारा लगाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी 13 साल की सत्ता में 13,000 घुसपैठिए भी बाहर नहीं निकाले  हैं, जबकि अपनी 10 साल की सत्ता में कांग्रेस की मनमोहन सरकार ने 80,000 से अधिक घुसपैठियों को बाहर निकाला था। फिर भी मीडिया-सोशल मीडिया पर कब्जे और उसके जरिए प्रोपोगेंडा फैला कर भाजपा ने हिंदू समाज हितैषी का मुखौटा धारण कर रखा है और उसी समाज को जातियों में बांट कर अपनी सत्ता का खेल खेल रही है!

सोशल मीडिया ने ज्यों ही @BJP4India को आईना दिखाया कि चुनाव से पहले 'जयश्री राम' और चुनाव के बाद 'जय भीम' को सलाम! तो फिर भाजपा को सामान्य सीटों की भी याद आ गई, जिस कारण आज वह बंगाल में सरकार बनाने जा रही है। https://t.co/jjlZZq0D5V

— संदीप देव | SSandeep Deo (@sdeo76) May 7, 2026

हिंदुत्व से किनारा कर, केवल ‘जय भीम’ को बंगाल जीत का श्रेय देने पर सोशल मीडिया उबल पड़ा। हारकर भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल से गुरुवार 7 मई 2026 को रात्रि 10.50 पर एक ‘सबका विश्वास’ टाइप कामचलाऊ पोस्ट किया गया, जिसमें लिखा गया कि “बंगाल में हर वर्ग ने दिया भाजपा को प्रचंड समर्थन! ये ऐतिहासिक जीत… भाजपा का मंत्र- ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ का परिणाम है।” फिर भी इस पोस्ट में सामान्य जाति और ओबीसी वर्ग को उस तरह श्रेय नहीं दिया गया, जैसे कि SC/ST को दिया गया और उनके समर्थन में दिलीप मंडल से सर्वणों को मुस्लिमों से जोड़ कर आलोचना कराई गई! भाजपा का चरित्र अब एक हिंदुवादी की जगह, जातिवादी-पसमंदावादी पार्टी की बन चुकी है और वह इसे बार-बार साबित भी कर रही है।

Ssandeep Deo May 7, 2026
🇮🇳 राष्ट्रहित और सत्य के पक्षधर बनें

साहसी पत्रकारिता की शक्ति बनें।

एल्गोरिदम की सेंसरशिप के विरुद्ध आपका साहस ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। India Speak Daily की खोजी पत्रकारिता और विशेष ऑडियो विश्लेषण तक सीधी पहुंच के लिए हमारे कुटुंब के सारथी बनें।

❤️ ISDian बनें — सदस्यता लें।

📢 हमारे WhatsApp और Telegram से जुड़ें

ब्रेकिंग न्यूज़, विशेष रिपोर्ट्स और महत्वपूर्ण अपडेट्स सीधे अपने मोबाइल पर प्राप्त करें।

✈ Telegram से जुड़ें ☘ WhatsApp से जुड़ें
⚡ तुरंत अपडेट्स • 📰 बड़ी खबरें • 🎙 विशेष रिपोर्ट्स • कोई स्पैम नहीं

जुड़ने के बाद आपको क्या मिलेगा?

⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ अलर्ट

महत्वपूर्ण खबर प्रकाशित होते ही तुरंत अपडेट पाएं।

📰 दिनभर की प्रमुख खबरें

बड़ी खबरों का आसान और संक्षिप्त सार सीधे आपके मोबाइल पर।

🛡 फेक न्यूज़ के खिलाफ

भ्रामक सूचनाओं पर तथ्य आधारित रिपोर्टिंग और विश्लेषण।

🇮🇳 राष्ट्रहित कवरेज

भारत और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष रिपोर्ट्स।

TAGGED: bengal bjp, bjp vs tmc, Mamata Banargee, sandeep deo blog, Suvendu Adhikari, west bengal, west bengal election, west bengal election 2026

Related

टीएमसी नेता शाहजहां के खिलाफ 6 दिन में 700 शिकायते !       

अर्चना कुमारी महिलाएं सड़क पर इंसाफ मांग रही क्योंकि ममता...

May 7 2026

जिसे अपना इतिहास नहीं पता वह कुलटा-पुत्र के समान है!

स्वजातिपूर्वजानां तु यो न जानाति संभवम्।स भवेत् पुंश्चलीपुत्र सदृश: पितृवेदक।।...

April 23 2022

India Speaks Daily - ISD News

अपने बेटों की कुर्बानी क्यों नहीं देते जो दूसरे प्राणियों के बच्चों को काट रहे हो?

सुबह से फेसबुक के वॉल पर हर जगह ढाका की...

May 7 2026

माफिया अतीक अहमद की तरह उसका भाई तो कायर निकला , कहा- ‘नहीं लग रहा डर !

अर्चना कुमारी। माफिया डॉन अतीक अहमद ने न जाने कितने...

May 7 2026

Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Print
Ssandeep Deo
Posted by Ssandeep Deo
Follow:
Journalist from 2.5 decades | Bestseller Author by Nielsen Jagran | Awarded the Sahitya Akademi Award for his book writing | He also received the Pandit Madan Mohan Malaviya Award and the Shivaji Ratna Award for journalism | Founder Editor of https://www.indiaspeakdaily.in
2 Comments
  • Avatar Anonymous says:
    May 8, 2026 at 12:01 pm

    34 lakh व्हाट्सएप ग्रुप्स पर प्रोपेगैंडा चलाया जा रहा है कि बंगाल में BJP के जीतते ही घुसपैठिये घर छोड़कर भाग रहे हैं, और ब्रेन डेड हिन्दू इसे मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं। मैंने ऐसे ही एक को कहा कि चुनौती है 5 साल में 5 लाख घुसपैठिये भी मोदी निकालकर बता दें।

    Loading...
    Reply
  • Avatar Anonymous says:
    May 8, 2026 at 1:21 pm

    जीतने के बाद सवर्णों को लात पडी़ तो मंडल बहुत खुश हुआ उसे नहीं पता लात तो तुझे भी पड़ेगी!!सगा तो मुस्लिम और क्रिश्चियन ही है!!!

    Loading...
    Reply

Leave your Comments BelowCancel reply

--- Advertisement ---
Ad imageAd image
Ad imageAd image
Ad imageAd image

You Might Also Like

Members OnlySDEO's Storyजातिवाद

एपिसोड-3: “हज़रत पैगंबर के अनुयायियों ने सोमनाथ की मूर्तियों के टुकड़े कर शूद्रों को मुक्त कराया”—‘गुलामगिरी’ के इस संवाद से क्या सिद्ध करना चाहते थे फुले?

October 7, 2026
Members OnlySDEO's Storyजातिवाद

एपिसोड-2: मैक्स मूलर का नस्लवाद और ज्योतिराव फुले: अपने ही पुरखों को विदेशी हमलावर बताकर समाज को बांटने का औपनिवेशिक खेल!

October 5, 2026
Members OnlySDEO's Story

आस्था का आवरण, मुनाफे का सिंडिकेट: भाजपा राज में बीफ इंडस्ट्री का कॉर्पोरेटाइजेशन और सत्ता की सांठगांठ!

October 5, 2026
Members OnlySDEO's Storyजातिवाद

एपिसोड-1: NCERT के जरिए बच्चों के मानस में औपनिवेशिक जहर: मिशनरी एजेंडा और फुले का विखंडनवादी विमर्श!

October 2, 2026
//

India Speak Daily – No Left – No Right, Only Sanatani Voice.

Popular Categories

  • ISD Radio
  • ISD Videos
  • JOIN US / LOGIN

Quick Links

  • Refund & Cancellation Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • Terms of Service
  • Advertise With ISD

Copyright © 2015 - 2026 - Kapot Media Network LLP. All Rights Reserved.

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Register Lost your password?
%d