संदीप देव। संघ-भाजपा ‘न खाऊंगा-न खाने दूंगा’ का जुमला उछाल कल स्वयं को दूध का धुला बताने में कोई कसर नहीं छोड़ते, लेकिन सच तो यह है कि भ्रष्टाचारऔर अनैतिकता में कांग्रेस पार्टी को वह मीलों पीछे छोड़ चुके हैं। संघियों की सरकार में सामने आए सबसे बड़े शिक्षा घोटाले-व्यापमं में एक समय मप्र के तब के मुख्यमंत्री से लेकर तत्कालीन संघ प्रमुख तक का नाम सामने आया था, परंतु सत्ता के कारण वह इसे दबाने में सफल रहे थे! परंतु जिस तरह से 26 मार्च 2026 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मप्र सरकार और सीबीआई को फटकार लगाई है, उसे देखकर लगता है कि सुप्रीम कोर्ट इस घोटाले को दबाए जाने से खिन्न है! लगभग 11 साल पुराने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की यह सक्रियता संकेत देती है कि न्यायपालिका इस भ्रष्टाचार के मूल तक पहुँचने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से गवाहों की ‘संदिग्ध मौतों’ और ‘प्रभावशाली व्यक्तियों’ की भूमिका पर फिर से नज़र डाली जा सकती है जो पूर्व की जांचों में संदेहास्पद रहे थे। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पुनः ‘संघी-नेटवर्क’ द्वारा किया गया व्यापमं घोटाला सुर्खियों में है।
पूर्व संघ प्रमुख से भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री तक: जानिए उन चेहरों को जिनका नाम व्यापमं घोटाला में आया था!
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Bohot choukane wale tathya hain.