संदीप देव। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले भारत-अमेरिका की डील में औपचारिक रूप से लिखवाया:-
“भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा। वह अमेरिकी हथियार भी खरीदेगा। अगर हमें लगेगा कि भारत ने किसी भी तरह से रूस से तेल ख़रीदना पुनः शुरू कर दिया है तो भारत पर फिर से 25% टैरिफ़ लगाया जाएगा।”
भारत की संप्रभुता पर चोट करती ट्रंप की यह धमकी लिखित रूप में और औपचारिक है और भारत सरकार उस पर हस्ताक्षर कर आई है!
उसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप एक वीडियो बयान जारी करता है और कहता है, “मैं नरेंद्र मोदी का पोलिटिकल करियर बर्बाद नहीं करना चहता!”
वह वीडियो में कह रहा है, “मोदी ट्रम्प से प्यार करते हैं, क्योंकि मैं उनका पॉलिटिकल करियर खत्म कर सकता हूं!”
देश के प्रधानमंत्री और सरकार की चुप्पी यदि अभी भी बनी रहती है तो फिर यह समस्या बेहद गंभीर है! देश को इस पर सवाल उठाने चाहिए? भारत-पाकिस्तान के बीच ‘सीज फायर’ की सूचना भी देश को ट्रंप के पोस्ट से मिली थी, न कि भारत सरकार से! आखिर यह लगातार क्यों हो रहा है?
सोचिए वह नरेंद्र मोदी की ऐसी कौन-सी नस दबाए बैठा है कि:-
१) भारत सरकार 0-18% पर ‘ट्रेड डील’ कर लेती है। अर्थात् अमेरिकी समान पर 0% और भारतीय सामान पर 18% टैक्स लगेगा?
२) वह ऐसी कौन-सी नस दबाए बैठा है कि भारत सरकार ने भारत को ‘ऊर्जा गुलामी’ में ढकेल दिया। अब अमेरिका तय कर रहा है कि हमें किससे ईंधन खरीदना है और किससे नहीं?
३) वह ऐसी कौन-सी नस दबाए बैठा है कि रूस जैसे पारंपरिक मित्र से भारत सरकार हाथ पीछे खींच लेती है, बिना यह सोचे कि अभी भी भारत अपने 70% हथियार के कल-पुर्जे के लिए रूस पर निर्भर है।
४) वह कौन-सी ऐसी नस दबाए बैठा है कि भारत सरकार देश की पूर्व की सभी सरकारों के निर्णय को पलटते हुए भारत के कृषि क्षेत्र को अमेरिक के अमीर कॉर्पोरेट किसान फर्म के लिए खोल देती है और डेयरी इंडस्ट्रीज में ‘अमेरिकी पशु चारा’ को घुसा कर भारत की ‘श्वेत क्रांति’ को बट्टा लगाने की दिशा में कदम बढ़ा देती है!
५) वह ऐसी कौन-सी नस दबाए बैठा है कि भारत सरकार ट्रंप की धमकी की भाषा को ‘ट्रेड डील’ में औपचारिक रूप से स्वीकार लेती है?
६) वह कौन सी ऐसी नस दबाए बैठा है कि भारत सरकार के दो-दो मंत्री इस ‘ट्रेड डील’ पर जानकारी देने से बचते हुए एक-दूसरे पर मामला डाल देते हैं?
७) वह कौन-सी ऐसी नस दबाए है कि भारत सरकार भारत की संप्रभुता, गरिमा और उसके सम्मान को ट्रंप के पैरों तले रौंदवा रही है?
बता दूं कि भारत-अमेरिका ‘ट्रेड डील’ पिछले छह महीने से संभव नहीं हो पा रहा था। इस बीच #EpsteinFiles बाहर आया और आनन-फानन में भारत के हितों को रौंदते हुए भारत सरकार ने समझौता कर लिया! एप्सटीन फाइल में सरकार के मुखिया सहित एक केन्द्रीय मंत्री का नाम आया है, जो भारत की संप्रभुता और विदेश नीति पर प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा कर रहा है?
एक और जानकारी दे दूं कि यह चर्चा है कि एप्सटीन फाइल में अभी भी तीन मिलियन से अधिक डाटा बचा हुआ है, जो अभी तक रिलीज नहीं हुआ है। कहा जा रहा है कि रूस के ‘मित्रोखिन अर्काइव’ में जैसे विदेश और विदेशी नेताओं व सरकारों पर अलग सेक्शन था, उसी तरह #Epstein के फाइल में अमेरिका के बाहर के विदेशी नेताओं और सरकार पर काफी कुछ है! ट्रंप की खुलेआम मौखिक और औपचारिक रूप से लिखित धमकी कहीं इस ओर इशारा तो नहीं?
भारत के प्रधानमंत्री अब तो अपनी चुप्पी तोड़ें और बताएं कि आखिर वह भारत को अमेरिकी उपनिवेश बनाने की कोशिश में क्यों जुटे हुए हैं? यदि ऐसा नहीं है तो ‘ट्रेड डील’ की औपचारिक भाषा से लेकर ट्रंप की धमकी तक पर मौन क्यों साधा जा रहा है?
भारत से बड़े नहीं हैं भारत के प्रधानमंत्री! वह भूल रहे हैं कि बोफोर्स, अगस्तावेस्टलैंड आदि फाइल पर जनता ने कांग्रेस से सवाल पूछा था। उनके नेताओं को चुनाव में बक्शा नहीं था! आप देश से हैं प्रधानमंत्री जी, देश आपसे नहीं हैं!
‘पोलिटिकल गुलामों’ के अतिरिक्त देश की अन्य जनता देश की संप्रभुता से खिलवाड़ को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी!
