विश्व का सबसे-गंदा नेता , बोलो है किस देश में ?
नहीं धर्म का – नहीं देश का , शैतान है साधु वेश में ।
भूले से भी सच न बोले, केवल लफ्फाजी व जुमलेबाजी ;
चोरी, गबन ,व्यभिचार व हत्या , हिंदू के संग धोखेबाजी ।
एपस्टीन-फाइल का हीरो , चरित्रहीन ये एकदम जीरो ;
मां ,बहन ,पत्नी व बेटी , नहीं किसी का है ये नीरो ।
पूरा भारत – वर्ष जल रहा , पर ये बजा रहा है बंशी ;
कूट-कूट कर स्वार्थ भरा है , हद दर्जे की अय्याशी ।
चौथापन चल रहा आयु का , फिर भी रास-रंग में डूबा ;
लाखों का मेकअप-ड्रेस बदलता , कामुकता के पंक में डूबा ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू की , बेमिसाल है महामूर्खता ;
अपने सबसे बड़े शत्रु को , अपना हृदय-सम्राट बनाता ।
विकल्प नहीं ये कहता रहता,अमृत की जगह जहर को पीता ;
ऐसा हिंदू आत्महत्यारा है , पता नहीं ये क्यों कर जीता ?
हिंदू की लगभग आधी-आबादी , ऐसे ही इन मूर्खों की है ;
डाक्टर ,वकील ,शिक्षक ,अभियन्ता , बहुसंख्या धूर्तों की है ।
हिप्पोक्रेसी बहुत अधिक है , पाखण्ड – दोगलापन ज्यादा ;
जिसकी पूंछ उठा कर देखो , निकल रहे हैं सब मादा ।
कितने निकृष्ट वे पापी हिंदू ? शंकराचार्य पर झूठा-केस ;
जिस देश में ऐसे पापी होंगे , उससे अच्छा है परदेस ।
भारत के चारों तरफ देश हैं , सबके नेता भारत से श्रेष्ठ ;
वे अपने मजहब के पक्के , विदेश-नीति में हैं अतिश्रेष्ठ ।
भारत की कोई नीति नहीं है , सब की सब हैं पूर्ण अनीति ;
लूटो – खाओ – मौज मनाओ , अय्याशी की गंदी रीति ।
भारत का अध्याय ये काला , पता नहीं ये चलेगा कब तक ?
एपस्टीन-फाइल का खुलासा , पूरी तरह न होगा जब तक ।
और नहीं है मार्ग दूसरा , भारत – वर्ष बचाने का ;
सुप्रीम-कोर्ट तक मौन हो चुका, क्या विप्लव हो जाने का ?
लगता विप्लव होने वाला है , गृहयुद्ध भयंकर हो सकता है ;
अब्बासी-हिंदू नेता के रहते, कुछ भी मुमकिन हो सकता है ।
भविष्य-मालिका भविष्य का दर्पण, साफ-साफ दिखलाता है ;
धर्म छोड़ने वाला हिंदू , किसी भांति न बच पाता है ।
धर्म करेगा उसी की रक्षा , जो धर्म की रक्षा करता है ;
“धर्मो रक्षति रक्षित : “ , निश्चित ही ऐसा होता है ।
धर्म बचाओ – देश बचाओ व अच्छी – सरकार बनाओ ;
वरना वो दिन दूर नहीं है, जब सौ-करोड़ तक मिट जाओ ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
