चाहे लाखों दिये जला लो
चाहे लाखों दिये जला लो, इसका दिया है बुझने वाला ;
कर्मों का फल मिलने वाला , कोई नहीं बचाने वाला ।
हालांकि शैतान है इसका , पर वो भी पिट जायेगा ;
सारे भेद खुल चुके इसके , बहुत शीघ्र ये मिट जायेगा ।
काफी हिंदू जाग चुके हैं, नस-नस इसकी पहचान चुके हैं ;
थोड़े से अंधे अंधभक्त हैं , जोकि जीवित नहीं बचे हैं ।
जिनकी आत्मा कुचल चुकी हो, तब भला कहाॅं वे जीवित हैं ?
वे तो मृतक समान हो चुके, जीवित लोगों में वर्जित हैं ।
अंधभक्त हैं छूत के रोगी , हिंदू ! इनसे बचकर रहना ;
ब्रेनडेड ये सब के सब हैं , इनकी कोई बात न सुनना ।
इनकी मौत का जो परवाना, खुद इन्होंने उसे बनाया है ;
घर-परिवार सहित जायेंगे , इनके हिस्से में ये आया है ।
जैसी करनी – वैसी भरनी , ये शाश्वत – सिद्धांत है ;
घड़ा पाप का निश्चित फूटेगा , हर पापी का दुखान्त है ।
बड़े कष्ट से जान जायेगी , तिल-तिल कर मरना होगा ;
पाप की दौलत धरी रहेगी , कुछ भी काम न आयेगा ।
अकल के अंधो ! अब भी सुन लो , धर्म-मार्ग पर आ जाओ ;
“राम-मंदिर” के चोर-लुटेरे, उनका साथ अब नहीं निभाओ ।
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता, विश्व का सबसे-बड़ा है पापी ;
धर्म , देश , जनता से धोखा , कहीं नहीं है ऐसा पापी ।
ऐसा कोई कहीं नहीं है , जिसको इसने ठगा नहीं है ;
कितने हिंदू-मंदिर लूटे हैं ? लेखा-जोखा कहीं नहीं है ।
चोरी का माल कहाॅं रखा है ? “केयर-फंड” में रखा है ;
इसी से कोई जान न पाया, सुप्रीम-कोर्ट का भी हिस्सा है ।
भारत की हर-बर्बादी का , सुप्रीम-कोर्ट ही वजह बना है ;
चोरों का सरपरस्त बन गया , उनका भागीदार बना है ।
कर्मों का फल सभी पायेंगे , कोई पापी नहीं बचेगा ;
नेता , अफसर , न्यायाधीश , बाबा , व्यापारी सभी मिटेगा ।
इन लोगों की जो हरकत है, जानो क्या होने वाला है ?
खून की नदियां-रक्त का सागर,गृहयुद्ध-भयंकर होने वाला है ।
“भविष्य-मालिका” बता रही है, सौ-करोड़ तक मिट जायेंगे ;
“धर्मनिष्ठ” जो “सत्यनिष्ठ” हैं , “विष्णु-कृपा” को पायेंगे ।
तैंतीस-करोड़ के लगभग हिंदू ! धर्म-मार्ग पर चलने वाले ;
“विष्णु-कृपा” से यही बचेंगे , “धर्म-ध्वजा” फहराने वाले ।
चरित्रहीन अब्बासी – हिंदू , बुद्धि पूरी तरह भ्रष्ट है ;
इसका दिया है बुझने वाला,अब दल-बल सहित ये नष्ट है ।
“जय सनातन-धर्म”,रचनाकार:ब्रजेश सिंह सेंगर
