संदीपदेव । भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी से जब EpsteinFiles पर TV डिबेट में पूछा गया तो उन्होंने बात को हवा में उड़ाने के लिहाज से कहा कि उसमें तो गांधी जी का भी नाम है! परंतु अमेरिकी ACYPL ट्रेंड सुधांशु ने यह नहीं बताया कि गांधी Epstein से पूछकर भारत की विदेश नीति नहीं बना रहे थे, जैसा कि मोदी सरकार के मंत्री हरदीप पुरी और उद्यमी अनिल अंबानी एप्सटीन के साथ मिलकर भारत की विदेश नीति को शेप दे रहे थे! असली सवाल यह है जिससे भाजपा के प्रवक्ता भागने और ध्यान बंटाने के लिए अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं!
नीचे आपको एक टेबल दे रहा हूं, जिसे मेरी टीम ने एप्सटीन फाइल में जारी सैंकड़ो मेल को खंघालने के बाद बनाया है। इसमें एप्सटीन-पुरी-अंबानी की मुलाकात और उसके तुरंत बाद हुए हमारी विदेश नीति में परिवर्तन का तिथिवार जिक्र है। यह तिथि एप्सटीन-पुरी-अंबानी के उस मेल से निकाला गया है, जो संघ-भाजपा की प्रिय अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने जारी किया है।


ऐसी तीन और तालिका मैंने अपने विस्तृत शोध परक लेख में दी है, जिससे आपको बहुत कुछ स्पष्ट हो जाएगा कि आखिर भारत का विदेश मंत्रालय ट्रंप की बत्तमीजी का जवाब क्यों नहीं दे पा रहा है और भारत-अमेरिका ‘ट्रेड डील’ अमेरिका की ओर झुका हुआ क्यों है?
इससे भी कम साक्ष्य पर बोफोर्स और अगस्तावेस्टलैंड मामले में तब विपक्ष में रही भाजपा ने संसद गर्मा दिया था, अभी पता नहीं पुरी का इस्तीफा लेने में भाजपा की मोदी सरकार को पसीने क्यों आ रहे हैं? लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला एप्सटीन का नाम सुनते ही चिल्लाने क्यों लगते हैं और क्यों संसद की कार्यवाही से इसे निकालने का आदेश जारी करने लगते हैं? हरदीप पुरी ऐसा कोई बड़ा नेता भी नहीं हैं, जिसे बचाने के लिए पूरी मोदी सरकार और भाजपा जुट गई है? आखिर क्यों?
हां, यदि आप इसमें मोसाद एजेंट एप्सटीन और मोसाद के रणनीतिकार योनी कोरेन के साथ हरदीप पुरी के रिश्ते और पुरी की बेटी की कंपनी में आए रॉबर्ट मिलर और जॉर्ज सोरोस की फंडिंग का एंगल जोड़ लें तो पता चल जाएगा कि यह सरकार हरदीप पुरी का बचाव क्यों कर रही है?
यह पूरी शोधपरक और विस्तृत रिपोर्ट टेक्सट और पॉडकास्ट वर्जन में नीचे दिए लिंक से जाकर आप पढ़/सुन सकते हैं। धन्यवाद।
Podcast: यौन अपराधी Epstein के घर से तय हो रही थी भारत की विदेश नीति?
