सरकार का यह एक अच्छा निर्णय है। लेकिन इस पर अमल होता है या केवल चुनावी प्रचार ही बन कर रह जाएगा ये भी मायने रखता है। सभी प्रमुख सनातन के धार्मिक स्थानों पर केवल सनातनियों को ही प्रवेश होना चाहिए। और वहां अहिन्दू यानी जो अवैदिक हिंदू है और किसी भी सनातन विचारधारा को नहीं मानता उसको भी वहां स्वयं ही प्रवेश नहीं करना चाहिए, जैसे कम्युनिस्ट, वामपंथी, कांग्रेसी, या किसी भी राजनीतिक पार्टी के संघी आदि। क्योंकि ये भी अवैदिक यानी अहिन्दू ही हैं।
हरिद्वार में हर की पौड़ी पर ऐसी कई दुकानें हैं जो हिंदुओं के द्वारा संचालित है, उन पर भी संज्ञान किया जाए और उनका भी स्थान परिवर्तित किया जाए या बंद किया जाय। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता है तो यह केवल एक चुनावी स्टंट रह जाएगा। दूर-दूर से आने वाले हिंदुओं को इस बात की जानकारी ही नहीं होती है कि वहां कौन दुकानों का संचालन कर रहा है। वे दुकानदार यूपीआई से पेमेंट नहीं लेते हैं क्योंकि इससे उनकी पहचानो जाकर हो जाती है और इसको मैं स्वयं भी भुगत चुका हूं।
तो खबर कुछ यूं है कि –
सनातन आस्था के प्रमुख तीर्थ हरकी पैड़ी की पवित्रता और मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए श्री गंगा सभा ने सख्त रुख अपनाया है। हरकी पैड़ी क्षेत्र के 10 से अधिक स्थलों पर अहिन्दू प्रवेश निषेध क्षेत्र के बोर्ड लगाए गए हैं।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि हरकी पैड़ी और मालवीय द्वीप क्षेत्र में ड्रोन उड़ाना, फिल्मी गीतों पर रील बनाना अथवा किसी भी प्रकार का फिल्मांकन पूर्णत प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई सामग्री यदि इंटरनेट मीडिया पर वायरल होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध श्री गंगा सभा की ओर से कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हरिद्वार में श्री गंगा सभा, तीर्थ पुरोहित, संत-संन्यासी और धार्मिक संगठन की ओर से सरकार से कुंभ क्षेत्र को अमृत क्षेत्र घोषित करने की मांग की जा रही है। इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए हिंदू श्रद्धालु, अधिकारी, पत्रकार और स्वयंसेवक ही पात्र हों, जिससे सनातन परंपराओं की मर्यादा बनी रहे।
इसी बीच गुरुवार की रात को हरकी पैड़ी, मालवीय द्वीप और अस्थि प्रवाह घाट क्षेत्र में अहिन्दू प्रवेश निषेध के बोर्ड लगाए गए हैं।
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने बताया कि बोर्ड लगाने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को हरकी पैड़ी क्षेत्र के नियमों और कानूनों की सही जानकारी देना है। इस क्षेत्र में उसी के लिए प्रवेश है जो श्रद्धालु गंगा में स्नान करता है, प्रसाद ग्रहण करता है, गंगा जल का आचमन करता है, उसकी आस्था हिंदू धर्म, हमारी देव परंपराओं और सनातन संस्कृति से जुड़ी होती है। इसी आस्था के भाव के साथ श्रद्धालु हरकी पैड़ी आता है और उसकी पवित्रता बनाए रखना सभी का दायित्व है।
