By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
India Speak DailyIndia Speak Daily
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
    • मुद्दा
    • न्यायपालिका
    • अपराध
    • भ्रष्टाचार
    • जन समस्या
    • Events and Activities
    • Health Report
    • ISD Radio
    • ISD videos
    • English content
  • मीडिया
    • खोजी आलेख
    • मेनस्ट्रीम जर्नलिज्म
    • डिजिटल मीडिया
    • फिफ्थ कॉलम
    • फेक न्यूज भंडाफोड़
    • कानाफूसी
  • वैचारिकी
    • संघवाद
    • अस्मितावाद
    • जातिवाद
    • पंचमक्कारवाद
    • व्यक्तिवाद
    • समाजशास्त्र
    • राजनीतिक व्यक्तित्व
    • संपादकीय
  • इतिहास
    • स्वर्णिम भारत
    • गुलाम भारत
    • आजाद भारत
    • विश्व इतिहास
    • अनोखा इतिहास
  • धर्म
    • सनातन हिंदू धर्म
    • दर्शन और संप्रदाय
    • वास्तु एवं ज्योतिष
    • अब्राहमिक मजहब
    • उपदेश एवं उपदेशक
  • ब्लॉग
    • मूवी ज़ोन
    • भाषा और साहित्य
    • स्वयंसेवी प्रयास
    • कुछ नया
    • पर्यटन
    • नारी जगत
    • पुस्तकें
    • प्रेरक व्यक्तित्व
    • AI | Tech & Careers
    • SDEO’s Story
    • Sponsored Post
  • Members Only
  • JOIN US / LOGIN
Reading: चुनाव आयोग का कच्चा चिट्ठा अंदरूनी लोगों ने ही खोला: 14 आपत्तियों और ‘अवैध’ फैसलों से मची खलबली!
Share
Notification
Latest News
उप्र के सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी नागेश्वर राव की पार्टी!
Events and Activities
न्यायपालिका में बंद दरवाजों के बीच चल रही सौदेबाजी पर एक न्यायाधीश का विस्फोट!
न्यायपालिका संपादकीय
चुनावी मशीनरी पर संस्थागत कब्जे की नई ‘क्रोनोलॉजी’: कहीं भाई स्पीकर, कहीं पिता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष—चुनावी कुर्सियों पर ‘हितों के टकराव’ का खतरनाक राष्ट्रीय सिंडिकेट!
खोजी आलेख
आखिर इतनी डरी हुई क्यों है सरकार? #ISD Live Video
ISD videos
मोदी सरकार की ‘झुकती रीढ़’ और एलन मस्क का दुस्साहस! जब मोदी सरकार ने मस्क के लिए बदला कानून, तो मस्क ने शुरू की ब्लैकमेलिंग!
खोजी आलेख
Aa
Aa
India Speak DailyIndia Speak Daily
  • ISD Radio
  • ISD Videos
  • JOIN US / LOGIN
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
    • मुद्दा
    • न्यायपालिका
    • अपराध
    • भ्रष्टाचार
    • जन समस्या
    • Events and Activities
    • Health Report
    • ISD Radio
    • ISD videos
    • English content
  • मीडिया
    • खोजी आलेख
    • मेनस्ट्रीम जर्नलिज्म
    • डिजिटल मीडिया
    • फिफ्थ कॉलम
    • फेक न्यूज भंडाफोड़
    • कानाफूसी
  • वैचारिकी
    • संघवाद
    • अस्मितावाद
    • जातिवाद
    • पंचमक्कारवाद
    • व्यक्तिवाद
    • समाजशास्त्र
    • राजनीतिक व्यक्तित्व
    • संपादकीय
  • इतिहास
    • स्वर्णिम भारत
    • गुलाम भारत
    • आजाद भारत
    • विश्व इतिहास
    • अनोखा इतिहास
  • धर्म
    • सनातन हिंदू धर्म
    • दर्शन और संप्रदाय
    • वास्तु एवं ज्योतिष
    • अब्राहमिक मजहब
    • उपदेश एवं उपदेशक
  • ब्लॉग
    • मूवी ज़ोन
    • भाषा और साहित्य
    • स्वयंसेवी प्रयास
    • कुछ नया
    • पर्यटन
    • नारी जगत
    • पुस्तकें
    • प्रेरक व्यक्तित्व
    • AI | Tech & Careers
    • SDEO’s Story
    • Sponsored Post
  • Members Only
  • JOIN US / LOGIN
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Website Design & Developed By: WebNet Creatives
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
India Speak Daily > मीडिया > खोजी आलेख > चुनाव आयोग का कच्चा चिट्ठा अंदरूनी लोगों ने ही खोला: 14 आपत्तियों और ‘अवैध’ फैसलों से मची खलबली!
खोजी आलेख

चुनाव आयोग का कच्चा चिट्ठा अंदरूनी लोगों ने ही खोला: 14 आपत्तियों और ‘अवैध’ फैसलों से मची खलबली!

ISD News Network
By ISD News Network 10 Min Read
Share
10 Min Read
SHARE

इंडिया स्पीक डेली ब्यूरो, नई दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर एक अभूतपूर्व संवैधानिक और प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की हालिया खोजी रिपोर्ट ने निर्वाचन सदन के भीतर चल रहे गहरे आंतरिक टकराव, एकतरफा फैसलों और नियमों की अनदेखी का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है।

CEC Gyanesh Kumar और Election Commissioners के बीच कथित मतभेदों की खबर सामने लाने वाली Ritika Chopra ने खोले SIR से जुड़े कई बड़े राज! आखिर चुनाव आयोग के अंदर हुआ क्या था? पूरी कहानी वीडियो में. #SIR #GyaneshKumar #ElectionCommission #IndianExpress #SukhbirSinghSandhu… pic.twitter.com/UVsYuLqiQN

— Jansatta (@Jansatta) September 24, 2026

रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर साथी चुनाव आयुक्तों ने लगातार गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं, नियमों को ताक पर रखकर सॉफ्टवेयर का केंद्रीकरण किया गया और युवा मतदाताओं के पंजीकरण तक को रोके रखा गया। अब यह पूरा मामला बॉम्बे हाईकोर्ट की चौखट तक पहुँच चुका है।

10 महीनों में 14 बार लिखित आपत्तियां, कैबिनेट सचिव तक पहुंची बात

More Read

न्यायपालिका में बंद दरवाजों के बीच चल रही सौदेबाजी पर एक न्यायाधीश का विस्फोट!
चुनावी मशीनरी पर संस्थागत कब्जे की नई ‘क्रोनोलॉजी’: कहीं भाई स्पीकर, कहीं पिता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष—चुनावी कुर्सियों पर ‘हितों के टकराव’ का खतरनाक राष्ट्रीय सिंडिकेट!
मोदी सरकार की ‘झुकती रीढ़’ और एलन मस्क का दुस्साहस! जब मोदी सरकार ने मस्क के लिए बदला कानून, तो मस्क ने शुरू की ब्लैकमेलिंग!
क्या यूपी का चुनाव पूरी तरह ‘Compromise’ हो चुका है? सॉफ्टवेयर से 85,854 वोटरों का खात्मा और 16 लाख रहस्यमयी नाम—चुनाव आयोग के खेल का दूसरा बड़ा भंडाफोड़!

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की पड़ताल के मुताबिक, नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर साथी चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फाइलों पर 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं। स्थिति इतनी असामान्य थी कि एक ही दिन में चार-चार आपत्तियां दर्ज की गईं।

The Election Commission of India is under fire like never before.

The SIR has struck 13 crore names off draft rolls, putting the EC at the centre of intense public debate over its role in deciding who gets to vote — and who doesn’t.

HOWEVER, what nobody knew: through that same… pic.twitter.com/CC1QIdqk1L

— Ritika Chopra (@RitikaChopra__) September 23, 2026

मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े ‘फॉर्म-6’ में वैधानिक प्रक्रियाओं के बिना बदलाव थोपे गए, जिसे चुनाव आयुक्त संधू ने आधिकारिक नोट में साफ़ तौर पर ‘अनाधिकृत और अवैध’ (Unauthorised and Illegal) करार दिया। इसके साथ ही, राज्य स्तर पर संचालित होने वाले मतदाता सूची के डेटाबेस और सॉफ्टवेयर के दिल्ली में हो रहे ‘क्रमिक केंद्रीकरण’ पर कड़ा ऐतराज जताते हुए दोनों आयुक्तों ने देश के कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को अलग-अलग पत्र भेजकर सीधे हस्तक्षेप की मांग की थी।

‘फुल कमीशन‘ की मंजूरी के बिना जारी हुए आदेश

खुलासे से यह भी सामने आया है कि अप्रैल 2026 में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आंतरिक नोट लिखकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था कि निर्वाचन आयोग के नाम पर कई अहम नीतिगत परिपत्र और आदेश ‘पूरे आयोग’ (Full Commission) की वैधानिक सहमति के बिना ही एकतरफा जारी किए जा रहे हैं। संविधान के तहत बहु-सदस्यीय आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को दरकिनार किए जाने से आयोग के भीतर प्रशासनिक अधिकारों का खुला टकराव पैदा हो गया।

गोवा राज्य निर्वाचन आयोग की अनदेखी और Gen-Z वोटरों पर अड़ंगा

अखबार के खुलासे में यह तथ्य भी सामने आया है कि गोवा राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुपालन को लेकर महज 7 दिनों के भीतर केंद्रीय निर्वाचन आयोग को 8 बार ईमेल भेजे, लेकिन निर्वाचन सदन की ओर से उन पर कोई जवाब तक नहीं दिया गया।

रितिका चोपड़ा से सुनिए गोवा SIR की कहानी

चुनाव आयोग में हुई पूरी गड़बड़ी जानने के लिए देखिए हमारी इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट. इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर. pic.twitter.com/zhzWNTKAb9

— Indian Express Hindi (@IEhindi) September 24, 2026

इसके अलावा, रिपोर्टों में यह सनसनीखेज दावा भी सामने आया है कि जनवरी 2024 से नई पीढ़ी के पहली बार बने युवा मतदाताओं (‘Gen-Z’ voters) के नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अड़ंगा लगाया गया था। साथी दोनों चुनाव आयुक्त इस रोक के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने इस पर अपनी असहमति जताई थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका: CEC के 14 आदेशों को रद्द करने की मांग

इस खुलासे के सामने आते ही मामला अदालत की चौखट पर पहुँच गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद पारित किए गए सभी 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द (Quash) करने की गुहार लगाई गई है।

#BREAKING | Plea In Bombay High Court To Quash 14 Orders Passed By CEC Gyanesh Kumar Despite Objections Of 2 ECs |@NarsiBenwal

The petitioners also question the Maharashtra SIR process.#ElectionCommissionofIndia #ECI #MaharashtraSIRhttps://t.co/YdAoN75JyT

— Live Law (@LiveLawIndia) September 24, 2026

याचिकाकर्ताओं ने महाराष्ट्र में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की है। साथ ही अदालत से अपील की गई है कि जब तक हटाए गए मतदाताओं के नाम दोबारा बहाल कर पारदर्शी मतदाता सूची तैयार न हो, तब तक महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों को टाला जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक समिति का गठन किया जाए। याचिका में दलील दी गई है कि एकतरफा आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 और 326 (वयस्क मताधिकार) का खुला उल्लंघन हैं।

सुप्रीम कोर्ट में जजों की राय बंटी, मामला संविधान पीठ को रेफर

यह आंतरिक घमासान ऐसे समय में फूटा है जब मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े ‘मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023’ की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की पीठ पहले ही विभाजित हो चुकी है। इस कानून के तहत चयन समिति से देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर प्रधानमंत्री और एक केंद्रीय मंत्री को रखा गया था।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की राय बंटने के बाद यह मामला 5 जजों की संविधान पीठ के पास भेजा गया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर क्रिकेट मैच में एक टीम का कप्तान ही अंपायर चुनेगा, तो अंपायर के फैसलों पर हमेशा संदेह बना रहेगा।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले पैनल को चुनौती देने वाली याचिका पर अब संविधान पीठ सुनवाई करेगी।
कोर्ट ने ये भी कहा है कि यह मामला सालों तक पेंडिंग नहीं रहना चाहिए।

– कोर्ट ने पांच जजों की एक स्थाई संविधान पीठ बनाने की सिफारिश भी की है जो केवल संवैधानिक मामलों की सुनवाई करेगी।…

— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) September 23, 2026

2023 कानून की धारा 18: आयुक्तों को कानूनी मुकदमों से ‘सुरक्षा कवच‘

इस पूरे घटनाक्रम के बीच 2023 के अधिनियम की धारा 18 (Protection against legal proceedings) भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। इस धारा के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को उनके कार्यकाल के दौरान आधिकारिक कर्तव्यों के तहत लिए गए फैसलों के खिलाफ किसी भी अदालत में दीवानी या आपराधिक मुकदमे से कानूनी छूट (Immunity) दी गई है। राजनीतिक और कानूनी विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि जब पूर्व राष्ट्रपति या पूर्व प्रधानमंत्री तक को इस तरह की छूट हासिल नहीं है, तो चुनावी फैसलों को अदालती जवाबदेही से बाहर रखने का यह प्रावधान संस्थागत पारदर्शिता को प्रभावित करता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के कथित उल्लंघन के लिए CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांगhttps://t.co/FWXlw1bWJl#eci #gyaneshkumar #contemptofcourt #supremecourt pic.twitter.com/3YqooHnzTu

— LiveLaw Hindi (@LivelawH) September 24, 2026

फिलहाल विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और संसद में महाभियोग की मांग तेज कर दी है, जबकि निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि आयोग में आंतरिक विचार-विमर्श एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

खबर के अंत में जोड़ने के लिए एक तीखी और विश्लेषणात्मक निष्कर्ष टिप्पणी:

निष्कर्ष: लोकतंत्र के अंपायर का आत्मसमर्पण

निर्वाचन सदन की बंद दीवारों से रिसकर अदालतों की चौखट तक पहुँची यह कलह महज दो नौकरशाहों के अहं का टकराव नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की रीढ़ पर हुआ संस्थागत हमला है। जब चुनाव आयोग के अपने ही आयुक्त के फैसलों को ‘अवैध’ लिखने लगें, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को रद्दी की टोकरी में डालकर युवा मतदाताओं के पंजीकरण पर कुंडली मार ली जाए, और फिर उसी मनमानी को चुनौती देने के लिए नागरिकों को बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़े—तो समझ लेना चाहिए कि ‘अंपायर’ अर्थात् चुनाव आयोग अब निष्पक्ष नहीं रहा, बल्कि उसने अपनी जिम्मेदारी और निष्पक्षता को सत्ता के चरणों में गिरवी रख दी है।

2023 के विवादित कानून के जरिए मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बेदखल करना और फिर धारा 18 के तहत आयुक्तों को अभूतपूर्व कानूनी ढाल (इम्यूनिटी) पहनाना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित संवैधानिक चक्रव्यूह था। मकसद साफ था—मनचाहा अंपायर चुनो, मनमाने नियम थोपो और फिर किसी भी अदालती जवाबदेही से बेखौफ रहो। लेकिन व्यवस्था चलाने वालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि लोकतांत्रिक वैधता किसी सरकारी गजट या कानूनी ढाल से नहीं, जन-विश्वास से हासिल होती है।

यदि देश के मतदाताओं का भरोसा टूट गया तो फिर संसद, सरकार और जनादेश—सब कुछ केवल एक छलावा बनकर रह जाएगा। अब गेंद सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ और हाईकोर्ट के पाले में है; देखना यह है कि न्यायपालिका इस ‘संदिग्ध अंपायर’ को नियम पुस्तिका दिखाती है या भारतीय लोकतंत्र को व्यवस्थागत साठगांठ की भेंट चढ़ने के लिए वह भी सत्ता के साथ समझौते करती है?

इससे संबंधित अन्य खबरों का लिंक

चुनाव आयोग में दो-फाड़, नियमों का घनघोर उल्लंघन, मनमर्जी कर रहे ज्ञानेश कुमार?

संपादकीय: चुनाव आयोग में बगावत: ‘अवैध’ फैसलों और 14 आपत्तियों ने खोली निष्पक्षता की पोल!

संपादकीय…न्याय का रोस्टर पर रसूख की छाया: जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बदले नियम!

नोट:- यदि आपको हमारा यह दृष्टिकोण और वैचारिक स्पष्टता पसंद आई, तो हमारी स्वतंत्र व खोजी पत्रकारिता को संबल देने के लिए आज ही ISD परिवार से जुड़ें / सशुल्क सदस्यता लें।👇

ISD News Network September 25, 2026
🇮🇳 राष्ट्रहित और सत्य के पक्षधर बनें

साहसी पत्रकारिता की शक्ति बनें।

एल्गोरिदम की सेंसरशिप के विरुद्ध आपका साहस ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। India Speak Daily की खोजी पत्रकारिता और विशेष ऑडियो विश्लेषण तक सीधी पहुंच के लिए हमारे कुटुंब के सारथी बनें।

❤️ ISDian बनें — सदस्यता लें।

📢 हमारे WhatsApp और Telegram से जुड़ें

ब्रेकिंग न्यूज़, विशेष रिपोर्ट्स और महत्वपूर्ण अपडेट्स सीधे अपने मोबाइल पर प्राप्त करें।

✈ Telegram से जुड़ें ☘ WhatsApp से जुड़ें
⚡ तुरंत अपडेट्स • 📰 बड़ी खबरें • 🎙 विशेष रिपोर्ट्स • कोई स्पैम नहीं

जुड़ने के बाद आपको क्या मिलेगा?

⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ अलर्ट

महत्वपूर्ण खबर प्रकाशित होते ही तुरंत अपडेट पाएं।

📰 दिनभर की प्रमुख खबरें

बड़ी खबरों का आसान और संक्षिप्त सार सीधे आपके मोबाइल पर।

🛡 फेक न्यूज़ के खिलाफ

भ्रामक सूचनाओं पर तथ्य आधारित रिपोर्टिंग और विश्लेषण।

🇮🇳 राष्ट्रहित कवरेज

भारत और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष रिपोर्ट्स।

TAGGED: CEC Gyanesh Kumar, election commision, Election Commission of India, Election Commission of India (ECI), gyanesh kumar, Supreme Court

Related

‘धुरंधर’ डोभाल का असली सच और मिथ!

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की शक्ति, नेटवर्क, अभियानों और...

September 25 2026

Doval: A Myth Called National Security

Power, networks, operations and the unresolved record of India’s National...

September 25 2026

लोकतंत्र की छाया में: मोदी सरकार द्वारा चुनाव प्रबंधन के पांच स्तर

भारत के हालिया चुनावों में एक शांत लेकिन लगातार आवाज...

September 25 2026

Films, Think Tanks and the Invisible Alliance of Power?New Delhi

Is the Modi government manufacturing consent to whitewash its mistakes?...

September 25 2026

Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Print
ISD News Network
Posted by ISD News Network
Follow:
India Speak Daily is a News portal and YouTube channel dedicated to Investigative and Data-driven journalism, operating on the principles of "No Left, No Right—Only Sanatani Voice."
2 Comments
  • Avatar Anonymous says:
    September 25, 2026 at 10:12 pm

    ,🙏🚩

    Loading...
    Reply
  • Avatar Anonymous says:
    September 26, 2026 at 12:33 pm

    अंधेर नगरी…..

    Loading...
    Reply

Leave your Comments BelowCancel reply

--- Advertisement ---
Ad imageAd image
Ad imageAd image
Ad imageAd image

You Might Also Like

न्यायपालिकासंपादकीय

न्यायपालिका में बंद दरवाजों के बीच चल रही सौदेबाजी पर एक न्यायाधीश का विस्फोट!

October 12, 2026
खोजी आलेख

चुनावी मशीनरी पर संस्थागत कब्जे की नई ‘क्रोनोलॉजी’: कहीं भाई स्पीकर, कहीं पिता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष—चुनावी कुर्सियों पर ‘हितों के टकराव’ का खतरनाक राष्ट्रीय सिंडिकेट!

October 11, 2026
खोजी आलेख

मोदी सरकार की ‘झुकती रीढ़’ और एलन मस्क का दुस्साहस! जब मोदी सरकार ने मस्क के लिए बदला कानून, तो मस्क ने शुरू की ब्लैकमेलिंग!

October 10, 2026
खोजी आलेख

क्या यूपी का चुनाव पूरी तरह ‘Compromise’ हो चुका है? सॉफ्टवेयर से 85,854 वोटरों का खात्मा और 16 लाख रहस्यमयी नाम—चुनाव आयोग के खेल का दूसरा बड़ा भंडाफोड़!

October 9, 2026
//

India Speak Daily – No Left – No Right, Only Sanatani Voice.

Popular Categories

  • ISD Radio
  • ISD Videos
  • JOIN US / LOGIN

Quick Links

  • Refund & Cancellation Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • Terms of Service
  • Advertise With ISD

Copyright © 2015 - 2026 - Kapot Media Network LLP. All Rights Reserved.

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Register Lost your password?
%d