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India Speak Daily > वैचारिकी > संपादकीय > संपादकीय: ‘विश्वगुरु’ का कूटनीतिक समर्पण: अमेरिकी दबाव में छूटा भाड़े का सैनिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी, इटली के हत्यारे नौसैनिकों से लेकर आज तक—कहाँ गया ‘राष्ट्रवाद’?
संपादकीय

संपादकीय: ‘विश्वगुरु’ का कूटनीतिक समर्पण: अमेरिकी दबाव में छूटा भाड़े का सैनिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी, इटली के हत्यारे नौसैनिकों से लेकर आज तक—कहाँ गया ‘राष्ट्रवाद’?

ISD News Network
By ISD News Network 12 Min Read
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इंडिया स्पीक्स डेली (विशेष संपादकीय) देश के आंतरिक सुरक्षा तंत्र, संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा को लेकर किए जाने वाले ’56 इंची’ दावों की असलियत एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने तार-तार हो गई है। जिस मामले में भारत की सबसे बड़ी आतंकवाद-रोधी एजेंसी—राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)—ने मार्च 2026 में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक (Matthew Aaron VanDyke) और 6 यूक्रेनी नागरिकों को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंकवादी साजिश रचने के आरोप में पकड़ा था, आज वही सरकार अमेरिकी हुकूमत के आगे घुटनों पर नजर आ रही है।

तिहाड़ जेल से अमेरिकी भाड़े के सैनिक (mercenary) मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनियों को चुपचाप रिहा कर दिया गया। वैनडाइक दिल्ली से वाशिंगटन की फ्लाइट पकड़कर अमेरिका पहुंच भी चुका है। न कोई कड़ा ट्रायल, न कोई सजा—सिर्फ ₹5.5 लाख का मामूली जुर्माना और सुरक्षित निकासी का रेड- कार्पेट। जो यूएपीए (UAPA) भारतीय नागरिकों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर लगते ही वर्षों तक जमानत के सारे दरवाजे बंद कर देता है, वही कानून अमेरिकी और पश्चिमी ताकतों के सामने आते ही अचानक मोम की तरह पिघल गया।

पूर्वोत्तर से म्यांमार तक आतंक का खेल और एनआईए का बेशर्म यू-टर्न

मार्च 2026 में एनआईए ने देश के तीन प्रमुख हवाई अड्डों—कोलकाता से मैथ्यू वैनडाइक को और दिल्ली व लखनऊ से छह यूक्रेनी नागरिकों (पेट्रो हुर्बा, तारास स्लीव्याक, इवान सुकमैनोव्स्की, मारियन स्टेफानकिव, मक्सिम होनचारुक और विक्टर कामिंस्की) को गिरफ्तार किया था।

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एजेंसियों ने अदालत में बाकायदा हलफनामा देकर जो खुलासे किए थे, वे रोंगटे खड़े करने वाले थे:

1 . प्रतिबंधित सीमांत क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ: ये सातों विदेशी टूरिस्ट वीजा की आड़ में भारत आए और मिजोरम के अत्यधिक संवेदनशील, प्रतिबंधित और ‘प्रोटेक्टेड एरिया परमिट’ (PAP) वाले इलाकों में बिना किसी वैध अनुमति के हफ्तों तक सक्रिय रहे।

2 . अंतरराष्ट्रीय आतंकी ट्रेनिंग: इन्होंने भारतीय सीमा पार कर म्यांमार के ‘विक्टोरिया कैंप’ में प्रवेश किया। वहां म्यांमार के जातीय विद्रोही गुटों को यूरोप से लाए गए घातक ड्रोन, जैमिंग तकनीक और आधुनिक हथियारों का युद्ध-प्रशिक्षण दिया।

3 . नागरिक विमान पर ड्रोन हमले की साजिश: एनआईए ने अदालत में दर्ज अपनी रिमांड याचिकाओं में स्पष्ट रूप से खुलासा किया था कि ये विदेशी नागरिक म्यांमार में एक नागरिक विमान (Civilian Aircraft) पर हुए ड्रोन हमले की आतंकी साजिश से भी जुड़े हुए थे।

4 . भारतीय सीमा का इस्तेमाल: एनआईए ने पटियाला हाउस कोर्ट में दावा किया था कि इनके तार भारत-विरोधी विद्रोही गुटों से भी जुड़े थे और इन्होंने भारतीय भूभाग को आतंकी गतिविधियों के लॉन्च पैड और ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल किया।

इन संगीन आरोपों के आधार पर इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 18 (आतंकी साजिश) और बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज कर 180 दिनों तक जेल में रखा गया।

कूटनीतिक फोन कॉल्स और चार्जशीट से आतंक की धाराओं का ‘रहस्यमयी’ लोप

मैथ्यू वैनडाइक कोई साधारण पर्यटक नहीं है। वह ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ नाम से निजी सैन्य कंपनी चलाता है और लीबिया, सीरिया से लेकर यूक्रेन तक सीआईए और पश्चिमी शक्तियों के छद्म युद्धों (Proxy Wars) का मोहरा रहा है।

जैसे ही वैनडाइक की गिरफ्तारी हुई, वाशिंगटन में हलचल मच गई। मई 2026 में जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर आए, तो भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने यह मुद्दा सीधे भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री के सामने उठाया। अमेरिका का संदेश स्पष्ट था—वैनडाइक हमारा आदमी है, इसे रास्ता दो।

नतीजा वही हुआ जो कमजोर नेतृत्व वाले देशों में होता है। 180 दिनों की कानूनी मियाद पूरी होते ही, 8 सितंबर को एनआईए ने जो चार्जशीट दाखिल की, उसने पूरे देश की संप्रभुता का मखौल उड़ा दिया:

• यूएपीए पूरी तरह गायब: जिस केस की बुनियाद ही नागरिक विमान पर हमले और ड्रोन आतंकवाद पर टिकी थी, चार्जशीट में से UAPA की सभी धाराएं चुपचाप हटा दी गईं। मामला केवल नए ‘इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट’ के तहत मामूली वीजा उल्लंघन तक सीमित कर दिया गया।

• अदालत की फटकार और डिफ़ॉल्ट ज़मानत: राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज प्रशांत शर्मा ने एनआईए की इस नीयत को पकड़ते हुए टिप्पणी की कि जांच एजेंसी अधूरी (piecemeal) चार्जशीट पेश करके आरोपियों को डिफ़ॉल्ट बेल के अधिकार से वंचित नहीं रख सकती। यूएपीए हटने के कारण अदालत को कानूनन इन्हें डिफ़ॉल्ट ज़मानत देनी पड़ी।

• सरकारी वकील का आत्मसमर्पण: विशेष अदालत में जब वैनडाइक और यूक्रेनियों ने पासपोर्ट वापस लेने और विदेश जाने की अर्जी दी, तो एनआईए के विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) ने कोई कड़ा विरोध करने के बजाय अदालत से कह दिया कि “एजेंसी को आरोपियों की तत्काल उपस्थिति की कोई आवश्यकता नहीं है।”

• जुर्माना भरो और उड़ जाओ: विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) ने प्रत्येक पर ₹5.5 लाख का जुर्माना लगाकर अपराध का शमन (compounding) कर दिया। पासपोर्ट लौटा दिए गए और एक माह के भीतर ‘पारिवारिक यात्रा’ की आड़ में वैनडाइक को वाशिंगटन रवाना कर दिया गया। क्या कोई भी विवेकशील व्यक्ति यह मान सकता है कि अमेरिकी धरती पर पहुंचने के बाद कोई अंतरराष्ट्रीय भाड़े का सैनिक भारत लौटकर एनआईए की जांच में सहयोग करेगा?

पूर्व ‘रॉ’ एजेंट लकी बिष्ट का पर्दाफाश: राष्ट्रीय सुरक्षा से कूटनीतिक विश्वासघात

इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व ‘रॉ’ एजेंट और पूर्व एसपीजी कमांडो लकी बिष्ट ने फेसबुक पर एक वीडियो जारी कर सरकार और खुफिया तंत्र की कलई खोलकर रख दी है। लकी बिष्ट—जो देश के तत्कालीन वीवीआईपी सुरक्षा घेरे का हिस्सा रहे, 2009 में बेस्ट कमांडो चुने गए और जिन पर चर्चित लेखक हुसैन जैदी ने बायोग्राफी ‘रॉ हिटमैन’ लिखी है—ने इस रिहाई को देश के साथ खुला विश्वासघात बताया।

बिष्ट ने अपने वीडियो में सवाल उठाया कि जब ग्राउंड पर अपनी जान हथेली पर रखकर सुरक्षा एजेंसियां ऐसे खतरनाक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रकारियों को दबोचती हैं, तब बंद कमरों में वाशिंगटन के कूटनीतिक दबाव के आगे घुटने टेककर यूएपीए जैसी गंभीर धाराओं को चार्जशीट से कैसे गायब करवा दिया जाता है? लकी बिष्ट ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक नागरिक विमान पर हमले की साजिश और मिजोरम के जरिए म्यांमार में ड्रोन ट्रेनिंग देने के आतंकी आरोपों को महज ₹5.5 लाख के जुर्माने में रफा-दफा कर देना सीमा पर तैनात जवानों और खुफिया अधिकारियों के मनोबल पर करारा तमाचा है। यह दुनिया को संदेश देता है कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियां आज भी पश्चिमी ताकतों की चौखट पर बंधक बनी हुई हैं।

अतीत का आईना: इटली के हत्यारे नौसैनिकों की रिहाई भी तो इसी दौर में हुई!

आज वैनडाइक के मामले में जो लाचारी दिख रही है, उसकी नींव बहुत पहले रखी जा चुकी थी। 2012 में जब केरल के समुद्र में ‘एनरिका लेक्सी’ जहाज पर तैनात इटली के नौसैनिकों—मासिमिलियानो लातोरे और सल्वातोर गिरोने—ने दो निहत्थे भारतीय मछुआरों (जिलेस्टिन और अलेश) को गोलियों से भून दिया था, तब भाजपा और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार पर तीखे हमले बोले थे। मंचों से ‘इटली की दामाद सरकार’ जैसे जुमले उछाले गए और गर्जना की गई थी कि ‘भारत माता के बेटों के कातिलों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया जाएगा।’ लेकिन 2014 में सत्ता में आने के बाद क्या हुआ?

• 2014 से 2016 के बीच: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में ‘मानवीय आधार’ और ‘इलाज’ की दलीलों पर दोनों इतालवी नौसैनिकों को एक-एक कर इटली लौटने की छूट दे दी गई।

• जून 2021 का अंतिम समर्पण: हेग स्थित मध्यस्थता अदालत (PCA) के फैसले की आड़ लेकर, केंद्र की मोदी सरकार ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई कि भारत में चल रहे हत्या के आपराधिक मुकदमे को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए। केंद्र ने इटली सरकार द्वारा दिए गए ₹10 करोड़ के मुआवजे पर समझौता कर लिया और भारतीय मछुआरों के सीने छलनी करने वाले हत्यारे आधिकारिक तौर पर हमेशा के लिए बरी हो गए।

मोदी सरकार का दोहरा चरित्र: घरेलू मोर्चे पर शेर, वैश्विक ताकतों के आगे नतमस्तक

मैथ्यू वैनडाइक और इटली के नौसैनिकों का यह पूरा घटनाक्रम नरेंद्र मोदी सरकार के राष्ट्रवाद के दोहरे चरित्र को बेनकाब करता है:

1 . कानून का वीभत्स दोहरापन: देश के भीतर जब किसी स्थानीय नागरिक, पत्रकार या राजनीतिक विरोधी पर यूएपीए लगता है, तो उन्हें कई-कई साल बिना ट्रायल के जेलों में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। उनकी दवाइयों और चश्मों तक के लिए अदालत में गिड़गिड़ाना पड़ता है। लेकिन जब एक अमेरिकी भाड़े का सैनिक भारत की सीमा का उल्लंघन कर नागरिक विमान पर हमले और म्यांमार में हथियारों की ट्रेनिंग देता पकड़ा जाता है, तो 180 दिन पूरे होते ही चार्जशीट से आतंक की धाराएं चुपचाप गायब कर दी जाती हैं।

2 . सीमा सुरक्षा ग्रिड की घोर नाकामी: यह केवल कूटनीतिक दबाव का मामला नहीं है, बल्कि आंतरिक सुरक्षा की भी भारी नाकामी है। टूरिस्ट वीजा पर आए विदेशी नागरिक पूर्वोत्तर के अत्यधिक संवेदनशील और प्रोटेक्टेड एरिया परमिट वाले क्षेत्र (मिजोरम) में हफ्तों तक असम राइफल्स और आईबी (IB) की नाक के नीचे से सीमा पार करते रहे, ट्रेनिंग देते रहे और वापस भारत में घूमते रहे। इस अक्षम्य लापरवाही पर किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई।

3 . कमजोर और समझौतापरस्त आचरण: जो भाजपा कभी मनमोहन सिंह की सरकार पर सवाल दागती थी, आज वह किस मुंह से जनता से आंखें मिलाएगी? इटली के हत्यारे नौसैनिकों को देश से सुरक्षित बाहर निकालने की कानूनी रजामंदी इसी सरकार ने दी, और आज म्यांमार सीमा को अस्थिर करने वाले अमेरिकी सुरक्षा कॉन्ट्रैक्टर को भी इसी सरकार के तंत्र ने रेड-कार्पेट विदाई दी है। राष्ट्रीय संप्रभुता कोई चुनावी भाषण नहीं है जिसे रैलियों में उछालकर तालियां बटोरी जाएं और अंतरराष्ट्रीय दबाव आते ही तिलांजलि दे दी जाए। मैथ्यू वैनडाइक और यूक्रेनी नागरिकों की यह रहस्यमयी रिहाई साबित करती है कि ‘विश्वगुरु’ और ‘मजबूत राष्ट्रवाद’ का आवरण ओढ़े यह सरकार विदेशी ताकतों के आगे एक बेहद लाचार, कमजोर और रीढ़विहीन व्यवस्था बनकर रह गई है।

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4 Comments
  • Avatar Anonymous says:
    September 28, 2026 at 7:49 pm

    Priya Sandeep ji aapki sanatan voice ko sat sat naman, aapki presentation unique hai.

    Loading...
    Reply
  • Avatar Anonymous says:
    September 28, 2026 at 9:06 pm

    जय सियाराम हर हर महादेव संदिपजी आपकी पत्रकारिता का जबाब नहि!ऐसा हि देश सेवा मे बने रहिए!

    Loading...
    Reply
  • Avatar Anonymous says:
    September 28, 2026 at 9:15 pm

    आभार ISD का

    आँखे खोलने वाली खबर

    मुझे दुख है कि कभी मै भी इनका अंध भक्त हुआ करता था l

    Loading...
    Reply
  • Avatar Amit Kumar Ranjan says:
    September 29, 2026 at 8:25 pm

    यह सरकार सच में आज तक की सबसे बड़ी गद्दार सरकार है | आपका बहुत बहुत धन्यवाद संदीप भैया इस परिश्रम के साथ इन तथ्यों को हमें देने के लिए और हमारी आँखे खोलने के लिए, अन्यथा हम भी अभी अंधभक्ति कर रहे होते इन नीच लोगो की |

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