
डनिंग-क्रूगर इफेक्ट (Dunning-Kruger Effect) एक मनोवैज्ञानिक संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह (cognitive bias) है। जब कोई व्यक्ति किसी विषय में बहुत कम ज्ञान या कौशल रखता है, तो वह अपनी क्षमता को बहुत ज्यादा आंकता है। यानी वह सोचता है कि वह बहुत होशियार या कुशल है, जबकि असल में वह औसत से भी कम जानता है। इसके विपरीत, जो लोग वास्तव में बहुत कुशल होते हैं, वे अक्सर अपनी क्षमता को थोड़ा कम आंकते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि विषय कितना गहरा है।
यह कैसे काम करता है?
कम ज्ञान वाले लोग: थोड़ा-सा ज्ञान पाकर सोचने लगते हैं कि “मैं सब जानता हूँ”। अपनी गलतियों को पहचान नहीं पाते। दूसरों की क्षमता को भी कम आंकते हैं।
ज्यादा ज्ञान वाले लोग: विषय की जटिलता समझते हैं, इसलिए खुद को औसत या थोड़ा कम आंकते हैं। “मैं अभी भी बहुत कुछ सीख सकता हूँ” वाला रवैया रखते हैं।
रोजमर्रा की जिंदगी में उदाहरण: कोई व्यक्ति इंटरनेट पर 2-3 वीडियो देखकर किसी बीमारी का “एक्सपर्ट” बन जाता है और डॉक्टरों को गलत बताने लगता है। कोई थोड़ा-सा कोडिंग सीखकर खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर समझने लगता है। कोई थोड़ा राजनीति या अर्थशास्त्र पढ़कर पूरे देश की व्यवस्था समझाने लगता है।

इसकी खोज: इस प्रभाव को 1999 में मनोवैज्ञानिक डेविड डनिंग और जस्टिन क्रूगर ने अपने शोध में बताया था। इसलिए इसे डनिंग-क्रूगर इफेक्ट कहा जाता है।
संक्षेप में: “अज्ञानी व्यक्ति अपनी अज्ञानता को नहीं पहचान पाता, इसलिए वह खुद को बहुत ज्ञानी समझता है।”
निष्कर्ष और भारतीय राजनीति का उदाहरण:-
डनिंग-क्रूगर प्रभाव का सबसे प्रत्यक्ष उदाहरण सार्वजनिक विमर्श में तब दिखता है, जब नाली की गैस से चाय बनाने जैसी अवैज्ञानिक बातें कही जाएँ या घने बादलों की आड़ में रडार से लड़ाकू विमानों के छिप जाने जैसे हास्यास्पद तर्क गढ़े जाएँ! मंचों से ही..ही..खी..खी का अट्टहास और विदेशियों के समक्ष ‘सपना-सपना’ जैसी अर्थहीन बातें बोलकर स्वयं को ज्ञानी साबित करने का प्रयास किया जाए! इस अज्ञानता पर अहंकार की पराकाष्ठा यह कि विधिवत पढ़े-लिखे विशेषज्ञों और विद्वानों को अक्षम बताकर उनका उपहास उड़ाया जाता है, और जनसमूह के सामने ‘अहंकार में अवैज्ञानिक बातें करके अपने अल्पशिक्षित होने का भी ढिंढोरा पीटा जाता है! अपनी अज्ञानता को ही अपनी विशिष्ट उपलब्धि की तरह महिमामंडित करने बी बीमारी का नाम हैडनिंग-क्रूगर प्रभाव (Dunning–Kruger Effect), जिसका शिकार भारत की राजनीति है।
