श्वेताभ पाठक श्वेत प्रेम रस। प्रश्न- भैया, क्या हम जैसी ट्रेनिंग मन को देते हैं, मन वैसे ही कार्य करने लगता है ?
हमारा मन सही से कार्य करे, इसके लिए क्या करना चाहिए ??
उत्तर:- आदरणीय श्री श्वेताभ पाठक भैया जी
Parkinson’s Law जानते हैं ??
अगर किसी काम को करने के लिए किसी को 1 सप्ताह दिया जाय तो वह व्यक्ति 1 सप्ताह के अंदर कार्य करता है ।
अगर उसी काम को करने के लिए 2 दिन का समय दिया जाय तो वही कार्य मात्र 2 दिन में पूरा हो जाता है ।
अगर हम मन को बहुत छोटा लक्ष्य देते हैं तो वह छोटे कार्य के लिए ही प्रयत्न करता है भले उसकी शक्ति अद्भुत अवस्था की ही क्यों न हो ।
तब वह अपनी मनोस्थिति और atomic model का निर्माण भी उसी प्रकार से करता है और ब्रह्मांडीय ऊर्जा को भी उसी प्रकार से आकर्षित और ग्रहण करता है जिससे उसका विकास मात्र उतना ही रह जाता है ।
क्यों छोटे schools के बच्चों का मानसिक विकास और competition में crack करने की क्षमता उन बड़े बड़े Schools के बच्चों से कम होती हैं जहाँ competition बहुत होता है ??
एक अच्छे school का मतलब यही कि वहाँ competition अधिक होगा और brilliant brains आते हैं जिससे comparision करके बच्चों में विकास होता है ।
आप जानते हैं चीन हर olympics में सबसे अधिक Gold medals जीतने वाला देश क्यों होता है ??
जब आप study करेंगे तो पायेंगे , उनके बच्चे बचपन से ही toughest module में ढाल दिए जाते हैं और target भी उनको सबसे अधिक दिया जाता है जिसके कारण Olympics का target उनके लिए बच्चों का खेल होता है ।
सब Mind training है ।
मैं जब Children’s Academy से निकला था , school change हुआ था तो मैं वहाँ 5th और 4th position पर था क्योंकि वहाँ tough competition था ।
और जैसे ही मैं JKG स्कूल में पहुँचा , जहाँ Children’s Academy से 10 गुना बच्चे पढ़ते थे , वहाँ मैं School का brilliant boy माना गया ।
Brilliancy मेरे अंदर नहीं , उन बच्चों में कम थी जिनसे मेरा comparision हो रहा था ।
वहाँ competition कम था ।
मेरे पड़ोस में एक लड़की थी जो Children’s Academy में सबसे duffer बच्ची मानी जाती थी ।
घरवालों ने देखा कि यह नहीं चल पाएगी तो उन्होंने उसका admission किसी छोटे से स्कूल में करवा दिया , आप विश्वास नहीं करेंगे कि वही duffer बच्ची , उस school की सबसे intelligent और topper student गिनी जाती थी ।
It’s all about how you train your mind for a specific target .
It’s all about the mind nanagement and nothing else.
इसलिए Target सदा बड़ा रखो तभी उसी प्रकार से आपके अंदर जिजीविषा का विकास होगा और आपके अंदर निखार आएगा ।
छोटे targets तो स्वयं के विकास को छोटा करने का माध्यम है ।
अध्यात्म में तो सदा बड़े targets लें कि मेरा लक्ष्य कुंज के आनंद की प्राप्ति है ।
उस परमानंद की प्राप्ति है जो सबसे दुर्लभ है ।
गिरिजा अजा जलधिजा दुर्लभ , पियत रास रस ब्रज खोरी ।
अस रस मह मोहिं सद्गुरू बोरी ।
यह Formula students के लिए बहुत कारगर है ।।
