संदीपदेव । ब्राह्मणों से घृणा में ‘संघावत’ तो डॉक्टर आंबेडकर से भी आगे निकल गये। ‘संघावत’ ने जाति बनाने का दोष पंडितों अर्थात् ब्राह्मणों पर डाल कर ‘भीमयानियों’ को खुश करने का प्रयास किया था ताकि ‘भीमयानी’ संघी पार्टी भाजपा के स्थाई मतदाता बन सकें।
‘पसमांदा सुल्तान’, उनकी पार्टी भाजपा और संघ- सभी का जोर इसी पर है कि ब्राह्मणों, राजपूतों और अन्य सामान्य जातियों के विरुद्ध इतना घृणा फैलाओ कि SC/ST/OBC का सारा वोट एकमुश्त भाजपा को मिले! जबकि सच यह है कि हिंदू OBC का भी हक मारकर मुस्लिम OBC को दिया जा रहा है। बड़ी संख्या में मुस्लिम जातियों को OBC में जोड़ा गया है।
ANI को दिए साक्षात्कार में स्वयं ‘पसमांदा सुल्तान’ ने यह कहा था कि “जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो 70 मुस्लिम जातियों को OBC का लाभ देते थे।” अर्थात् संघी नेता हिन्दू सामान्य जातियों और OBC में लड़ाई करवा कर मुस्लिम OBC को इसका भरपूर लाभ पहुंचा रहे हैं! इसके लिए ‘पसमांदा सुल्तान’ ने हैदराबाद की पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में एक नया टर्म उछला था- ‘पसमांदा तृप्तिकरण’!
इस बैठक से पूर्व अखबारों, न्यूज चैनलों और चुनिंदा दक्षिणपंथी यूट्यूबरों को फंड किया गया था, ताकि पसमांदा समाज के प्रति हिंदुओं के बीच सहानुभूति का माहौल बनाने के लिए पिच तैयार किया जा सके जिस पर ‘पसमांदा सुल्तान’ नयी ‘गुगली’ डाल सकें और हैदराबाद में उन्होंने वही ‘गुगली’ डाली!
‘पसमांदावाद’ को बढ़ाने के लिए मीडिया और यूट्यूबरों को जो फंड किया गया था, इसकी जानकारी मुझे गृहमंत्रालय के एक सरकारी अधिकारी से ही मिली थी, जिस कारण मैं एक तथाकथित पसमांदा विशेषज्ञ को अपने चैनल पर लेकर आया और उसके मुंह से वह सच निकलवा लिया, जिसमें उसने स्वीकार किया था कि “पसमांदा समाज को जातिगत आरक्षण मिले, हम लोग इसके लिए प्रयासरत हैं।”
मेरे चैनल पर आने से पूर्व पसमांदा समाज से आने वाला वह तथाकथित विशेषज्ञ अखबारों में लेख लिख रहा था, न्यूज चैनलों पर विशेषज्ञ के रूप में बैठता था, कुछ एक यूट्यूब चैनल पर लगातार आता था और सभी जगह उसकी एक ही लाईन होती थी कि अशरफ व पसमांदा, दो अलग मुसलमान हैं और पसमांदा पीड़ित-शोषित-वंचित हैं! मीडिया और यूट्यूबर हिंदुओं को यह दिखाने का प्रयास करते थे कि ‘पसमांदा सुल्तान’ मुस्लिम समाज को बांट कर, हिंदुओं को मजबूत कर रहे हैं और मूढ़ हिंदू इस पर गहन चिंतन करने की जगह ताली पीटते हुए दिखते थे!
मैंने अपने चैनल पर उन पसमांदा विशेषज्ञ से पूछ लिया, ‘जब भारत में दंगा होता है तो हिंदुओं पर हमला अशरफ करते हैं या पसमांदा?’ जनाब को जवाब नहीं सूझा! वो जवाब देने की जगह जलेबी बनाने लगे!
बाद में एक यूट्यूब चैनल के मालिक ने मेरे साथ अपने ही चैनल पर एक चर्चा में सफाई पेश किया कि “मैं जिन पसमांदा विशेषज्ञ को अपने चैनल पर लाता हूं, वह आरक्षण की मांग नहीं कर रहे हैं, वह मुस्लिम समाज में अपने शोषण का मुद्दा उठा रहे हैं!” मैंने सार्वजनिक रूप से उन्हें टोका और कहा कि “आप सही नहीं बोल रहे हैं! मेरे चैनल पर आप अपने उस ‘प्रिय पसमांदा विशेषज्ञ’ को सुनिए, वह साफ-साफ हिंदू जातियों के आरक्षण में अपने लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं!” बेचारे ‘पसमांदावादी यूट्यूबर’ चुप हो गये! हिंदुओं को मूर्ख बनाने की ‘पसमांदा सुल्तान’ और उन जैसे दक्षिणपंथी मीडिया की साजिश खुल गई! गृहमंत्रालय के सरकारी अधिकारी ने मुझे जो कहा था कि ‘पसमांदाकरण’ पर माहौल बनाने के लिए मीडिया व यूट्यूब को फंड किया जा रहा है, उस एक चर्चा से मुझे इसकी पुष्टि हो गई!
फिर ‘पसमांदा सुल्तान’ ने हिंदू SC/ST आरक्षण में मुस्लिम-ईसाई को लाभ देने के लिए ‘जस्टिस बालकृष्णन आयोग’ का गठन कर दिया! और आश्चर्य वही मीडिया, वही न्यूज चैनल और वही यूट्यूबर इसमें भी ‘पसमांदा सुल्तान’ का ‘मास्टरस्ट्रोक’ तलाशते हुए इसे मुस्लिम समाज को बांटने वाला बताकर पुनः हिंदुओं को मूर्ख बनाने के प्रयास में जुट गये! मैंने फिर इसे एक्सपोज किया!

आज देखिए कि मणिपुर में जनजातीय (ST) आरक्षण में ईसाई कूकी के आरक्षण को बनाए रखने और उसमें मैतेई हिंदुओं को हिस्सा न मिले, इसके लिए मैतेई हिंदुओं के सर्वनाश पर चुप्पी से लेकर अपनी ही पार्टी के मैतेई मुख्यमंत्री को हटाने तक का काम किया गया है! फिर भी हिंदुओं का एक बड़ा वर्ग मूढ़ता की जिद पर अड़ा है कि “‘पसमांदा सुल्तान’, उनकी पार्टी भाजपा एवं संघ हिंदू हितैषी हैं! इनका कोई विकल्प नहीं है!” सही बात है, ‘गुलामों’ के लिए वैसे भी विकल्प कभी नहीं होता! विकल्प की तलाश तो चेतनशील मनुष्य करते हैं!
अब पुनः ‘संघावत’ के बयान पर लौटते हैं! ‘संघावत’ के उस बयान को भी काफी सारे लोगों ने जस्टिफाई किया था, जिसमें उसने ब्राह्मणों को जाति प्रथा का दोषी करार दिया।(Pic1) डॉ नेहा दास एक्स पर लिखती हैं:- “अंबेडकर ने 1916 में अपने लिखे पेपर में कहा था-
-“जाति व्यवस्था मनु द्वारा नहीं बनाई गई! जाति व्यवस्था मनु के काफ़ी पहले से स्थापित थी!”

-“ब्राह्मणों ने जाति व्यवस्था दूसरे समुदायों पर नहीं थोपा, ये उनके बस की बात नहीं थी!”(Pic 2&3)


संघ-भाजपा-‘पसमांदा सुल्तान’ का बस एक ही लक्ष्य है कि उनका वोट बैंक जो 34-36% के आसपास ठहर गया है, हिंदू समाज का जातीय विखंडन और ‘पसमांदा तृप्तिकरण’ के जरिए उसे 51-52% तक पहुंचाया जाए ताकि 2047 तक उनकी सत्ता अबाध गति से चलती रहे! साथ ही इसमें संघ-भाजपा के ‘विदेशी मालिक’ अमेरिकन की ‘क्रिटिकल रेस थ्योरी’ की पूर्ति भी हो जाती है! फिर हिंदू समाज के विखंडन और ‘पसमांदा तृप्तिकरण’ का प्रयास संघी क्यों न करें?
इस लेख को लिखने का मेरा आशय यही है कि यह SC/ST act, OBC को संवैधानिक दर्जा, UGC कानून आदि बहुत सोच-समझकर कर अपने लंबे राजनीतिक लाभ एवं अपने अमेरिकी आकाओं के हित में हिंदू समाज के विभाजन एवं मुस्लिम-ईसाई समुदाय के सशक्तिकरण के उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक रणनीति के तहत लाए गये हैं!
इसे अचानक उठाया गया कदम मत मानिए! संघ और उसकी पार्टी जब-जब सत्ता में आई है हिंदू समाज को जातियों में बांटने का कानून लेकर आई है! यह संयोग नहीं, वह प्रयोग है, जिसमें हिंदुओं की पीठ में उसके अपने बनकर छुरा घोंपने का पुराना इतिहास छिपा है!
