संदीप देव। इतिहास की तारीखों में 28 सितंबर, 2017 का दिन भारतीय लोकतंत्र के माथे पर एक गहरा काला धब्बा है। झारखंड के सिमडेगा जिले के कारीमाटी गाँव की 11 वर्षीय मासूम संतोषी कुमारी, जो आठ दिनों तक ‘भात-भात’ (चावल) की रट लगाते हुए अंततः दुनिया से विदा हो गई। वह किसी प्राकृतिक अकाल या अन्न की कमी से नहीं मरी थी, बल्कि उसे उस ‘डिजिटल गेटकीपर’ ने मार डाला जिसे हम गर्व से ‘आधार’ कहते हैं।
पार्ट-1 डिजिटल इंडिया: आपकी पहचान और पैसे पर पूर्ण नियंत्रण का दुष्चक्र!
🇮🇳 राष्ट्रहित और सत्य के पक्षधर बनें
साहसी पत्रकारिता की शक्ति बनें।
एल्गोरिदम की सेंसरशिप के विरुद्ध आपका साहस ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। India Speak Daily की खोजी पत्रकारिता और विशेष ऑडियो विश्लेषण तक सीधी पहुंच के लिए हमारे कुटुंब के सारथी बनें।
❤️ ISDian बनें — सदस्यता लें।📢 हमारे WhatsApp और Telegram से जुड़ें
ब्रेकिंग न्यूज़, विशेष रिपोर्ट्स और महत्वपूर्ण अपडेट्स सीधे अपने मोबाइल पर प्राप्त करें।
⚡ तुरंत अपडेट्स • 📰 बड़ी खबरें • 🎙 विशेष रिपोर्ट्स • कोई स्पैम नहीं
जुड़ने के बाद आपको क्या मिलेगा?
⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ अलर्ट
महत्वपूर्ण खबर प्रकाशित होते ही तुरंत अपडेट पाएं।
📰 दिनभर की प्रमुख खबरें
बड़ी खबरों का आसान और संक्षिप्त सार सीधे आपके मोबाइल पर।
🛡 फेक न्यूज़ के खिलाफ
भ्रामक सूचनाओं पर तथ्य आधारित रिपोर्टिंग और विश्लेषण।
🇮🇳 राष्ट्रहित कवरेज
भारत और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष रिपोर्ट्स।
Journalist from 2.5 decades | Bestseller Author by Nielsen Jagran | Awarded the Sahitya Akademi Award for his book writing | He also received the Pandit Madan Mohan Malaviya Award and the Shivaji Ratna Award for journalism | Founder Editor of https://www.indiaspeakdaily.in
8 Comments

Great analysis
धन्यवाद
😯😯😯
संदीप जी सरकार अगर memes से डर के सोशल मीडिया ban लाऐगी , मतलब memes से सरकार darti है ,haha 😀,aapne to sarkar ki weakness bata di 🤣, genz to memes banane mein expert hai…genz sach ko memes banae to? aur paid collaboration karke 1000 profiles sach wale memes ka prasar kare to….? sach aage badhte hi jaega…kyu ki satyamev jayate aisa upanishad kehte hai
सत्यमेव जयते
सर विध्यार्धी जीवन में पैसे की किल्लत रहती है चाहते हुए भी 100 रुपया महीना दे पाना संभव नहीं हो पाता पर अच्छी जानकारी प्राप्त करने की जिज्ञासा भी रहती है, अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारे जैसे लोगों के बारे मैं भी सोचें, मैं भी यह रिपोर्ट पढ़ना चाहता हूँ पर पढ़ नहीं पाया।
आपकी बात ठीक है, परंतु वेब को चलाना भी तो है। जो लोग शोध करते हैं, खबर डालते हैं, काम करते हैं उनकी सैलरी, कार्यालय खर्च भी तो निकालना है। यदि सब्सक्रिप्शन मॉडल नहीं अपनाएंगे तो विज्ञापन पर जाना होगा और फिर पत्रकारिता दबाव में आ जाएगी। वेब पोर्टल पर कंटेंट की जगह विज्ञापन भर जाएगा। वैसे भी वेब का ९०% कंटेंट नि:शुल्क ही है। यूट्यूब पत्रकारिता भी लोगों की इच्छा पर है, अर्थात नि: शुल्क है, हां जो सब्सक्रिप्शन पे करना चाहे कर सकता है। इंडिया स्पीक की पूरी पत्रकारिता का केवल एक खंड पेड है, वह भी लोग यदि नहीं करेंगे तो सिस्टम चलेगा कैसे? आप भी बताइए? शोधपरक कंटेंट के लिए थोड़ा तो पे करना होगा, जैसे अखबार आदि के लिए करते हैं। धन्यवाद।
भारत ने 2014 में एक राजनेता नहीं एक वैश्विक दलाल चुना है।