Courtesy Desk मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती द्वारा श्री रामसिया मंदिर को दान में दी गई करोड़ों की संपत्ति को अवैधानिक रूप से बेचने का मामला सामने आया है. पन्ना कलेक्टर के पास शिकायत की गई कि पन्ना राजघराने की बेटी स्वर्गीय चंद्रकुमारी जी देव, पिता यादवेंद्र सिंह जूदेव, ने पन्ना स्थित आराजी नंबर 2688/2, रकबा 0.179 हेक्टेयर भूमि एवं भवन क्रमांक 428/1 को वनवासी मूर्ति भगवान श्री रामसिया (बनवासी सीताराम जी) पर्णकुटी मंदिर, लक्ष्मीपुर, श्री रामचरण पादुका न्यास, मानस स्थली नंदीग्राम, लक्ष्मीपुर को दानपत्र के माध्यम से दान किया था. राजवंशियों ने यह शर्त भी रखी थी कि इस मूल्यवान संपत्ति से होने वाली आय का उपयोग मंदिर की व्यवस्थाओं में किया जाएगा.
हालांकि, ट्रस्ट के नाम दर्ज इस भूमि में संरक्षक के रूप में शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती का नाम खसरे में अंकित था. आरोप है कि उन्होंने 23 दिसंबर 2024 को इस भूमि की रजिस्ट्री अवैधानिक रूप से कर दी. इसके बाद 6 अगस्त 2025 को श्रीकांत दीक्षित ने उक्त भूमि को अब्दुल सलीम, पिता अब्दुल वहीद, को बेच दिया. इस मामले के सामने आने के बाद विरोध शुरू हुआ और नामांतरण निरस्त करने की मांग को लेकर कलेक्टर से शिकायत की गई.
बेचने का अधिकार नहीं
सुनवाई के दौरान पन्ना कलेक्टर ने पाया कि भूमि मंदिर के नाम दान की गई थी और शंकराचार्य का नाम केवल प्रबंधक के रूप में दर्ज था. इसलिए उन्हें भूमि बेचने या हस्तांतरित करने का अधिकार नहीं था. कलेक्टर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दान की गई संपत्ति का उपयोग धार्मिक और सार्वजनिक हित में होना चाहिए, लेकिन प्रबंधक द्वारा अपने नाम दर्ज होने का लाभ उठाकर भूमि का विक्रय किया गया, जो अवैधानिक है.
कलेक्टर ने लगाई रोक
इसी आधार पर कलेक्टर ने विक्रय पत्र को त्रुटिपूर्ण मानते हुए उसके आधार पर किए गए नामांतरण को शून्य घोषित करने योग्य बताया और इस पर रोक लगा दी. साथ ही, भूमि को दोबारा मंदिर के नाम दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं. मंदिर पक्ष के आवेदकों को रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए न्यायालय में अपील करने की सलाह भी दी गई है.
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