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India Speak Daily > मीडिया > डिजिटल मीडिया > असहिष्णुता का रोना रोने वाले आमिर, राहुल, केजरीवाल कहाँ हो? देखो ज़ायरा हार गयी कट्टरपंथियों से दंगल में !
डिजिटल मीडिया

असहिष्णुता का रोना रोने वाले आमिर, राहुल, केजरीवाल कहाँ हो? देखो ज़ायरा हार गयी कट्टरपंथियों से दंगल में !

Harish Chandra Burnwal
By Harish Chandra Burnwal 6 Min Read
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6 Min Read
India Speaks Daily - ISD News
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हरीश चन्द्र बर्णवाल।भारतीय समाज में इससे बड़ी और शर्मनाक घटना नहीं हो सकती, जब कश्मीर में रहने वाली एक 16 साल की बच्ची ने मुट्ठी भर मुस्लिम कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेक दिए। आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ से चर्चा में आई जायरा वसीम ने आतंकियों के सामने न सिर्फ समर्पण कर दिया, बल्कि उन तथाकथित बुद्धिजीवियों के मुंह पर तमाचा भी जड़ दिया, जो मोदी के विरोध में तो असहिष्णुता का डंका पीटने लगते हैं, लेकिन जायरा के मुद्दे पर इनके कानों में जूं तक नहीं रेंगती। इससे अच्छा तो आतंकवादियों से भरा पाकिस्तान है, जहां 14 साल की मलाला यूसुफजई के लिए उदारवादी लोगों ने बहुसंख्यक आतंकियों की भी नहीं सुनी।

कौन है जायरा वसीम

16 साल की जायरा वसीम मूल रूप से कश्मीरी है। इसने हाल ही में रिलीज आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘दंगल’ में काम किया है। जायरा ने इसमें गीता फोगाट के बचपन का किरदार निभाया है। इस वजह से जायरा को काफी शोहरत मिली। चंद दिनों पहले ही जायरा ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से भी मुलाकात की थी। महबूबा ने जायरा की जमकर तारीफ की थी।

हार गई जायरा वसीम

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जायरा के फिल्म में काम करने और महबूबा मुफ्ती से मिलने की वजह से कश्मीर के मुस्लिम कट्टरपंथी उनके पीछे पड़ गए थे। साथ ही सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया था। यहां तक कहा गया कि जायरा हिन्दुस्तान से मिल गई है। एक तरफ जहां जायरा के खिलाफ लगातार सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों ने अभियान चलाया, वहीं इस देश के तथाकथित बुद्धिजीवियों ने भी चुप्पी साध ली। इस वजह से जायरा अकेली पड़ गई।

जायरा का सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा

जायरा वसीम खुद को इतना अकेला महसूस करने लगी कि आखिरकार उसे सोशल मीडिया पर माफी मांगनी पड़ी। जायरा ने ट्विटर पर एक ओपन लेटर (खुली चिट्ठी) पोस्ट की है। उसने लिखा कि “हाल के समय में मैं जिन लोगों से मिली हूं, उससे कुछ लोगों को बुरा लगा है। मैं उन लोगों से माफी मांगना चाहती हूं। मेरा उन्हें दुख पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। मैं उन्हें कहना चाहती हूं कि मैं उनकी भावनाओं का सम्मान करती हूं। पिछले 6 महीने के दौरान जो कुछ हुआ उसके लिए माफी मांगना चाहती हूं।” जायरा आगे लिखती हैं कि “कुछ लोग मुझे कश्मीर में रोल मॉडल की तरह पेश कर रहे हैं, लेकिन मैं साफ कहना चाहती हूं कि मैं न तो रोल मॉडल हूं और न ही मुझे लोग फॉलो करें। ऐसा करना उन लोगों की बेईज्जती होगी। मैं यहां कोई बहस शुरू नहीं करना चाहती। जायरा आगे लिखती हैं “अल्‍लाह करम फरमाए और हमें आगाह करे।”

जायरा वसीम की ये दो पन्ने की चिट्ठी न सिर्फ उसकी बेबसी की कहानी बयां कर रही है, बल्कि ये सवाल उठा रही है कि क्या हिन्दुस्तान तालिबान बनने की राह पर अग्रसर है। इस चिट्टी से कई सवाल उठते हैं जिस आमिर खान और उनकी बीवी को असिष्णुता के मुद्दे पर भारत छोड़ने का मन कर रहा था, अब उनकी इस मुद्दे पर क्या राय है? क्या जायरा वसीम के मुद्दे पर भारत उन्हें ज्यादा सुरक्षित लगता है?

दादरी में जिस आरोपी अखलाक के मुद्दे पर राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, लालू यादव जैसे नेताओं ने देश के सारे काम ठप्प कर दिए थे, अब ये सारे लोग क्यों चुप हैं? असहिष्णुता का मुद्दा उठाकर जिन लेखकों, इतिहासकारों, फिल्मवालों के गैंग ने अवॉर्ड वापसी का ड्रामा क्रिएट किया था, क्या अब ये लोग फिर से अपने अवॉर्ड वापिस करेंगे? हैदराबाद में जिस रोहित वेमुला के मुद्दे को उठाकर सभी नेताओं और बुद्धिजीवियों ने सरकार को घेरने की कोशिश की थी, क्या ये लोग आज जायरा वसीम के मुद्दे पर भी सरकार को घेरेंगे?

JNU के मुद्दे पर जहां राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को आजादी का खतरा नजर आ रहा था, आज क्या उनको इस देश में सांस लेने में घुटन महसूस नहीं हो रही है? साफ है आजादी के नाम कट्टरपंथी मुसलमानों के आगे घुटने टेकने वालों के लिए आजादी और असहिष्णुता मुद्दा नहीं है। ये मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के लिए जान की ही नहीं, देश की बाजी भी लगा सकते हैं। गौरतलब है कि असहिष्णुता के मुद्दे पर 40 से ज्यादा लेखकों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाए। 13 इतिहासकार और कुछ वैज्ञानिकों ने भी राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाए हैं। जबकि दिबाकर बनर्जी जैसे 10 फिल्मकारों ने नेशनल अवॉर्ड लौटाए हैं। अब ये सारे लोग क्यों चुप हैं?

जाहिर तौर पर ऐसे लोगों का पर्दाफाश करना जरूरी है। अगर आप तलवार नहीं उठा सकते, तो कलम उठाइये। ऐसे तथाकथित बुद्धिजीवियों का पर्दाफाश कीजिए।

Harish Chandra Burnwal January 18, 2017
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