गृहयुद्ध-महायुद्ध-विश्वयुद्ध
जहाॅं नहीं कानून का शासन , अपराध-पाप बढ़ते जाते हैं ;
इक-दूजे की जेब काटते, ऐसे ही जीवन कटते जाते हैं ।
भारत की ठीक यही स्थिति है, सरकारें तक कानून तोड़तीं ;
भ्रष्टाचार है इसका कारण ,बढ़-चढ़ कर सब हाथ मारतीं ।
मूल-रूप से नेता गड़बड़ , अफसर भी वैसे हो जाते ;
दोनों मिलकर देश लूटते , व्यापारी बाबा भी संग आ जाते ।
चारों का गठजोड़ देश में , भ्रष्टाचार में गोते मारे ;
इस हमाम में नंगे होकर , नहा रहे मिलकर सारे ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , भ्रमित हो चुका पूर्ण रूप से ;
प्रेस – मीडिया महापातकी , प्रोपेगैण्डा छद्म – रूप से ।
अरबों – खरबों का विज्ञापन , सरकारें इनको देती हैं ;
इनके मालिक बिके हुये हैं , खबरें सब झूठी होती हैं ।
झूठी खबरों से भ्रमित है हिंदू , नाटक-नौटंकी में फंस जाता ;
जिसे धर्म का बोध नहीं है , पूरा मूरख ही बन जाता ।
एक – तिहाई देश का हिंदू , धर्महीन – अज्ञानी है ;
एक – तिहाई महामूर्ख हैं , इन सबकी अकथ-कहानी है ।
कुल दो-तिहाई देश का हिंदू , कितनी करुण-कहानी है ?
धर्म – सनातन भूलने वाले, इन सबकी जान तो जानी है ।
पढ़े-लिखे तक महामूर्ख हैं , बातें करके तो देखो ;
अपना सर ही पीटना पड़ता , इनके ज्ञान को जब देखो ।
बिल्कुल समझ नहीं है इनको , राजनीति की चालों का ;
नेता ने ऐसी अफीम चटाई , सर घूम चुका मतवालों का ।
तथाकथित हिंदूवादी दल , हर कार्य है इनका देश-विरोधी ;
समलैंगिक है मातृ-संस्था , सदा-सदा से धर्म-विरोधी ।
सदा से इनके दो-चेहरे हैं , हाथी के दांत दिखाने के ;
चाल – चरित्र व चेहरे इनके , भारत-वर्ष मिटाने के ।
संभल सको तो संभल जा हिंदू,बड़ा कठिन है अंतिम-मौका ;
तूफान बड़ा चलने वाला है, फिर नहीं मिले बचने का मौका ।
तूफान भयंकर मौत का होगा , चारों तरफ बरसेगी आग ;
गृहयुद्ध-महायुद्ध-विश्वयुद्ध , पूरी दुनिया में लगेगी आग ।
एपस्टीन-फाइल के कारण , लगी हुयी है सारी आग ;
अपना भेद न खुलने पाये , इस कारण नेता भड़काता आग ।
अमरीका-भारत की नस को , इजरायल ने दबा रखा है ;
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता,जिसने भारत को लुटा रखा है ।
अपनी सत्ता जाने के डर से , नेता गृहयुद्ध करा देगा ;
महायुद्ध ये बनते – बनते , विश्वयुद्ध बन जायेगा ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
