सर्कस का जोकर राजनीति में
सर्कस का जोकर राजनीति में,तरह-तरह करतब दिखलाता ;
दिन भर फैंसी-ड्रेस बदलता, लाखों का मेकअप करवाता ।
झूठ बोलने में माहिर है , रोकर भी दिखलाता है ;
पूरी दुनिया में घूम-घूम कर , अपना स्वांग दिखाता है ।
कोई भाषा समझ न आती , बिना बात पर हंसता है ;
दुनिया वाले मूर्ख समझते , कोई फर्क नहीं पड़ता है ।
अपना उल्लू सीधा करने में, खुद ही उल्लू बन जाता है ;
कभी भी इसको शर्म न आती , शर्मिंदा देश को करता है ।
बेशर्मी का योग साधकर , बहुत बड़ा योगी बनता है ;
इसके समर्थक महा-मूर्ख हैं , अंध-भक्त कहलाता है ।
अंध-भक्तों से घिरा हुआ है , जय-जय कार कराता है ;
बदले में भारतवर्ष लुटाता , जब पुरस्कार को पाता है ।
इसके जीवन की यही कहानी, बुड्ढे-जोकर को चढ़ी जवानी ;
एपस्टीन-फाइल का हीरो, उतर चुका है आंख का पानी ।
सड़ी-बुद्धि का बुड्ढा-जोकर,हरकत करने से बाज न आता ;
सर्कस छिन जाने से डरता है , तरह-तरह षड्यंत्र रचाता ।
बुद्धिहीन – अज्ञानी हिंदू , इसके करतब में फंस जाते हैं ;
इसको हृदय – सम्राट बनाकर , अपनी चिता सजाते हैं ।
हिंदू का सबसे बड़ा शत्रु है , जिसको हिंदू समझ न पाया ;
बहुत अधिक जो पढ़े-लिखे हैं,उनको तक इसने मूर्ख बनाया ।
डाक्टर वकील शिक्षक अभियंता,उनका बन बैठा नीतिनियंता;
धोखे से सर्कस हथियाया, उसके मालिक का कर दिया अंता ।
जनता थी सर्कस की मालिक,उससे सर्कस छीन लिया है ;
सभी कोर्ट इसके ताबे में, न्याय का हक भी छीन लिया है ।
इतना बड़ा बन चुका है पापी , पूरा – भारत थर्राया है ;
गैस की किल्लत बात है छोटी, देश में हर संकट आया है ।
हिंदू – धर्म मिटा देने का , गजवायेहिंद का एजेण्डा है ;
अब्राहमिक – ग्लोबल – एजेंडा , ये ही इसका एजेण्डा है ।
फ्री-मेजन इसका मजहब है , जो मानवता के दुश्मन हैं ;
ये शैतान को मानने वाले , धर्म-सनातन के दुश्मन हैं ।
ज्यादातर हिंदू ! महा-मूर्ख हैं, इस बारे में कुछ नहीं जानते ;
इससे भी बढ़कर बुरी बात है , अपना-धर्म भी नहीं मानते ।
धर्म-सनातन भूलने वाला , वो हिंदू ! बड़ा हतभागी है ;
सारा संकट इसीलिये है , हिंदू ही इसका सहभागी है ।
निर्णय का दिन निकट आ रहा, बच सको तो हिंदू बच जाओ ;
स्वार्थ, लोभ ,भय ,भ्रष्टाचार को , पूरी तरह छोड़ जाओ ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
