संदीप देव। भारतीय जनता पार्टी के अशोक रोड स्थित कार्यालय के पुस्तकालय में ‘प्रोपेगैंडा साइकोलॉजी के पिता’ एडवर्ड बर्नेज़ (Edward Bernays) की पुस्तक ‘प्रोपोगेंडा’ को मैंने बहुत पहले देखा था। तब मैंने सोचा था कि शायद लेफ्ट के प्रोपोगेंडा को काउंटर करने के लिए भाजपाई इसका अध्ययन करते होंगे, परंतु आज लग रहा है कि एडवर्ड बर्नेज़ संघ-भाजपा के वैचारिक पिता हों जैसे! जैसे-जैसे मैं बर्नेज की पुस्तक पढ़ता जा रहा हूं, भाजपा-संघ की पूरी प्रोपोगंडा राजनीति समझ में आती जा रही है। एडवर्ड बर्नेज़ (Edward Bernays) की यही पुस्तक जर्मनी में हिटलर के उत्थान का कारण बनी थी। हिटलर के प्रोपोगेंडा मंत्री गोयबल्स ने हिटलर की छवि गढ़ने और जर्मन के मन में ‘हिटलर का कोई विकल्प नहीं’, ‘हिटलर का विरोध राष्ट्र का विरोध’ जैसी अवधारणा गढ़ने में बर्नेज की पुस्तक ‘प्रोपोगेंडा’ का ही उपयोग किया था।
बर्नेज ने बताया है कि “कैसे समूहों की आदतों और विचारों को व्यवस्थित रूप से ‘मैनिपुलेट’ (Manipulate) किया जा सकता है।” उसने Engineering of Consent का सिद्धांत दिया और इसने कुछ व्यक्तियों और समूहों द्वारा वैश्विक राजनीति को कंट्रोल करने का आधार तैयार किया। भारत की राजनीति भी आज एडवर्ड बर्नेज की ‘प्रोपोगेंडा’ थ्योरी का जबरदस्त उदाहरण है, जहां सत्ताधारी भाजपा और उसकी मातृसंस्था RSS ने जन मानस के मस्तिष्क को प्रोपोगेंडा के जरिए एक तरह से कैद कर लिया है।
पढ़िए प्रोपेगेंडा के जरिए जन-मानस के मस्तिष्क को कैद करती भाजपाई राजनीति कैसे बर्नेज के सिद्धांत पर अक्षरशः चल रही है!
