संदीप देव। कल भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर मैंने अपने India Speak Daily के Live Streaming में जो कहा था, वही आप अमेरिका के ट्रेड रिप्रजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर से सुनें, जो इस डील के फाइनल पेपर के तैयार होने का गवाह है! अमेरिका पहले 25% का भारत पर टैरिफ लगाता है, फिर 7% की छूट दे देता है और बड़ी बात कि कृषि सहित ढेर सारे ‘मेड इन अमेरिका’ प्रोडक्ट पर टैरिफ 0% करवाता है और भारत के गुलाम इसे सेलिब्रेट करते हैं!
अरे वाजपेई सरकार और मनमोहन सरकार के समय से कहीं अधिक टैरिफ भारत पर अभी भी लगा हुआ है। उन दोनों सरकारों ने अमेरिकी वस्तु पर टैरिफ 0% नहीं किया था या कृषि क्षेत्र को नहीं खोला था, तब भी अमेरिका भारत पर आज से कम टैरिफ लगाता था!
देश की जनता जरा सोचें कि कैसे दरबारी मीडिया और ब्रेनडेड गुलामों की एक ऐसी जमात भारत में पैदा कर दी गई है, जो नेता की मिशनरी कहती है कि नाचो तो नाचता है, नेता की मिशनरी Whatsapp के जरिए आदेश देती है कि लोगों को मूर्ख बनाओ तो अपना दिमाग ताक पर रख कर लोगों को झूठ परोस कर मूर्ख बनाने लगता है!
कल यह ‘सरकारी गुलाम’ यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के पोस्ट को ही ठीक से पढ़ लेते तो अपनी मूर्खता का यूं ढिंढोरा नहीं पीट रहे होते!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पोस्ट में साफ-साफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नेतृत्व स्वीकार किया है। अर्थात् भारत अब गुटनिरपेक्षता या रूसी मित्रता को छोड़ कर अमेरिका के पीछे चलेगा यह देश के प्रधानमंत्री ही स्पष्ट रूप से लिख कर कह रहे हैं!
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का पोस्ट पढ़िए, वह स्पष्ट लिख रहे हैं कि “मोदी ने कहा है कि अब वह रूस से तेल नहीं खरीदेंगे अमेरिका और वेनेजुएला (अमेरिका ही) से खरीदेंगे।” यदि हम आंकड़ों में देखें तो दिसंबर 2025 से भारत अमेरिका के दबाव में रूसी तेल में कमी लाना आरंभ कर चुका है। अर्थात् ट्रंप का कहा भारत की तेल खरीद के आंकड़ों में ही दिख रहा है अंधों!



अर्थात् भारत की अर्थनीति, विदेश नीति और या कहें देश की संप्रभुता को पूरी तरह से अमेरिका के कदमों में मोदी सरकार ने न केवल रख दिया है, बल्कि खुद के पोस्ट में इसे स्वीकार भी कर रहे हैं कि अब ट्रंप हमारा लीडर है!
देश के गौरव से इतना बड़ा खिलवाड़ हो गया, लेकिन दरबारी मीडिया और सरकारी गुलाम इतने अंधे हैं कि ‘देश द्रोह’ को भी सेलिब्रेट कर रहे हैं? ऐसे लोगों के कारण ही मुगल और अंग्रेज हम पर राज कर पाए! अब व्यापारी अमेरिका राज करेगा!
कैसै? तो सुनिए नीचे के वीडियो में! पढ़िए दुनिया भर के अखबारों में कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कैसे अमेरिका का पलड़ा भारी है। बिगत कई महीनों से जो ट्रेड डील फाइनल नहीं हो पा रहा था, वह ‘एप्सटीन फाइल’ खुलने और उसमें 130 से अधिक बार ‘मोदी जी’ का नाम आने के अगले ही दिन कैसे हो गया?
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर कह रहा है, “भारत जिन अमेरिकी उत्पादों पर पहले 13.5% टैरिफ लगाता था, उसमें से 98-99% वस्तुओं पर अब 0% टैरिफ लगाएगा। यह अमेरिका के लिए बड़ी जीत है!” जीरो टैरिफ की बात ट्रंप भी अपने पोस्ट में कह चुके हैं। अर्थात् अमेरिकी जीत में भारत के ‘ब्रेनडेड गद्दार’ नाच रहे हैं!
वह कह रहा है, “इस जीरो टैरिफ में कृषि उत्पाद भी शामिल है।” अर्थात् भारत ने कृषि क्षेत्र को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोल दिया है! ग्रीर के अनुसार, “भारत विभिन्न कृषि उत्पादों के अलावा, मैन्युफैक्चर्ड सामानों, रसायनों और चिकित्सा उपकरणों पर भी टैरिफ कम करेगा। साथ ही भारत अमेरिका से तेल, गैस, प्रोपेन भी खरीदेगा।”
अब सस्ते अमेरिकी मक्का, सोयाबीन और डेरी उत्पाद आदि भारतीय किसानों और पशुपालकों को तबाह कर देंगे! ट्रंप ने भी अपने पोस्ट में कृषि उत्पाद के लिए भारत का बाजार खुलने का जिक्र किया है।
कल से पहले सभी प्रधानमंत्री यहां तक कि मोदी भी अमेरिकी कृषि उत्पाद के लिए भारत के बाजार को खोलने के विरुद्ध थे! ‘ब्रेनडेड गुलाम’ बता सकते हैं कि इस एक दिन में ‘एप्सटीन फाइल’ आने के अलावा ऐसा और क्या हुआ कि भारत के प्रधानमंत्री ने भारत की खेती-किसानी को दांव पर लगा दिया?
इसके बावजूद संसद में इस ‘ट्रेड डील’ के लिए प्रधानमंत्री मोदी के गले में भाजपाई मंत्री फूलों का हार पहना रहे हैं, भाजपाई सांसद ‘वंदे मातरम्’ का नारा लगा रहे हैं? जनता को ‘मूर्ख बनाने के लिए संसद से मीडिया-सोशल मीडिया तक और आने वाले समय में संभवतः सेमिनारों और सड़क तक यह सारा तामझाम (इवेंट/मार्केटिंग) किया जाए! लेकिन असलियत तो देश के समक्ष एक न एक दिन आना ही है, जब नये ‘डील’ के तहत व्यापार शुरू होगा! झूठ कब तक फूलों के हार की आड़ में छुपाया जाएगा?
लगता है भारत से गद्दारी और उसकी संप्रभुता को रौंदना ही इस ‘न्यू इंडिया’ में ‘देशभक्ति’ है!
