आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज। इस वक्त इनकी ही चर्चा है। इसकी दो वजहें हैं। पहली- दो बटुकों के जरिए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर कुकर्म का मुकदमा दर्ज करवाना। दूसरी- पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर हैं। रेप, गो-तस्करी, फर्जीवाड़ा जैसे गंभीर धाराओं में 27 केस दर्ज हैं।
जज के रूम में रखी पत्रावली में फर्जी साइन करके गैर जमानती वारंट (NBW) जारी करवा दिया। जमीन कब्जाने के लिए ट्रस्ट बनाए। गो-तस्करी के मामले में एसपी को रिश्वत देने पहुंच गए। स्कूल के लिए घर कब्जाया और फिर विधवा से रेप का आरोप। ऐसे ही तमाम मामले दर्ज हैं।
आशुतोष का शुरुआती नाम अश्विनी शर्मा था। कुछ वक्त के बाद नाम बदलकर आशुतोष पांडेय कर लिया। बाद में नाम के आगे भृगवंशी लिखने लगे। 5 साल पहले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज नाम कर लिया।
2002 में पहली बार आशुतोष पर मुकदमा दर्ज हुआ। धाराएं 324, 504, 506 लगीं। इन धाराओं का मतलब है- जानबूझकर चोट पहुंचाना, अपमानित करना और धमकी देना। पुलिस प्रशासन बीच-बीच में आशुतोष पांडेय पर दर्ज मुकदमों की लिस्ट जारी करता है।
2019 तक की जो लिस्ट है, उसमें कुल 21 मुकदमे दर्ज हैं। इस वक्त तक कुल 27 मुकदमे दर्ज हैं। आशुतोष के बारे में जानकारी हासिल करने पर पता चला कि जितने मुकदमे दर्ज हैं, उससे कहीं अधिक आशुतोष ने दूसरे लोगों पर दर्ज करवाए हैं। आशुतोष के खिलाफ दर्ज प्रमुख मुकदमों से जुड़े लोगों से हमने बात की।
बात 2010 की है। उस वक्त आशुतोष पांडेय ने कांधला में ही एक स्कूल खोला। इसके लिए वहीं की एक विधवा महिला का घर किराए पर लिया। कुछ दिन तो किराया दिया, लेकिन फिर कब्जा कर लिया। किराया भी नहीं दिया। दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि 2012 में आशुतोष उस विधवा महिला के घर में घुसे और उसके साथ रेप किया। महिला ने कांधला में केस दर्ज करवाया।
आशुतोष की क्राइम हिस्ट्री खंगालने पर एक मामला गोंडा का मिलता है। ये मामला 2012 का है, गो-तस्करी से जुड़ा है। आशुतोष ने उस वक्त गोंडा के एसपी नवनीत कुमार राणा से मुलाकात की। कहा कि गोंडा की सीमा से पशुओं से लदा ट्रक जाने दिया जाए। अभी पुलिस रोकती है, इसके लिए हम पैसा दे देंगे। एसपी को पहले तो यह सिरफिरा लगा, लेकिन बाद में उन्होंने गंभीरता से लेते हुए उसे अगले दिन बुलाया।
