अरावली वरदान देश का (भाग-2)
अरावली वरदान देश का , वीर – भूमि की शान है ;
“राणा-प्रताप” की कर्म-भूमि है , मुगलों का श्मशान है ।
अब्बासी-हिंदू भारत के नेता , क्या मुगलों की संतान हैं ?
डीएनए क्या मिला हुआ है ? क्यों म्लेच्छ ही इनकी जान हैं ?
महाम्लेच्छ – व्यापारी – साथी संग , मिलकर देश लूटने हैं ;
क्या जंगल हैं ? क्या पर्वत हैं ? इनके लिये टूटते हैं ।
धर्म के द्रोही – देश के द्रोही , राजनीति में बहुमत है ;
छल-बल से सत्ता हथियायी , असहाय कर दिया जनमत है ।
देश पर जिनका अवैध – कब्जा , लगातार वे देश लूटते ;
न्याय – व्यवस्था चौपट करके , संविधान का गला घोंटते ।
पूरा देश आग में झोंका , अब पूरा देश जला देंगे ;
यदि अब भी हिंदू न जागा तो , गजवायेहिंद करा देंगे ।
जो चरित्रहीन हैं भ्रष्टाचारी , उनको हिंदू क्यों मानो ?
भेंड़ की खाल में छिपे भेड़िये , उनको अपना दुश्मन जानो ।
तिलक-त्रिपुंड की नाटक-नौटंकी , बहुत बड़े ये धोखेबाज ;
भूले से भी सच न बोलें , लफ्फाज बड़े हैं जुमलेबाज ।
धर्महीन-अज्ञानी हिंदू ! लटके – झटकों में फंस जाता है ;
साजिश करके हिंदू मरवाते , जिससे हिंदू डर जाता है ।
मरता हिंदू डरता हिंदू , डरकर वोट इन्हें दे देता ;
इसी तरह सत्ता हथियाता , अब्बासी-हिंदू भारत का नेता ।
जागो हिंदू ! अब तो जागो , धर्म – देश व राष्ट्र बचाओ ;
सारे जंगल – झील बचाओ , अरावली – पर्वत को बचाओ ।
अब्बासी-हिंदू की गहरी-साजिश , भारतवर्ष नष्ट करने की ;
लगातार ये सफल हो रहा , हुयी देश की हालत मरने की ।
अब या तो हिंदू आगे आये या सदा-सदा को मिट जाये ;
भारत घिरा हुआ दुश्मन से ,क्या फिर से ये गुलाम हो जाये ?
स्थिति बहुत बुरी भारत की , पर क्यों हिंदू ! अनजान है ?
मरता मानव क्या न करता ? जब खतरे में होती जान है ।
अज्ञान की निद्रा छोड़नी होगी,सबको सड़कों पर आना होगा ;
“जैन-जी” को सक्रिय करके , भारत-वर्ष बचाना होगा ।
यदि अरावली को बचा लिया तो भारत भी बच जायेगा ;
“श्री-गणेश” इससे ही होगा , फिर किला फतह हो जायेगा ।
सबको आगे बढ़ते जाना है , पीछे मुड़ने का काम नहीं है ;
धर्म बचेगा – देश बचेगा , वरना भारत का नाम नहीं है ।
अभी नहीं तो कभी नहीं , ये करो – मरो की बेला है ;
जो देशभक्त सब आगे आयें , वरना क्या देश अकेला है ?
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
