अपूज्या यत्र पूज्यन्ते (भाग-2)
भारतवर्ष बचेगा कैसे ? अच्छी – सरकार बनाना होगा ;
अच्छी – सरकार बनेगी कैसे ? ई वी एम हटाना होगा ।
ई वी एम हटेगा कैसे ? निष्पक्ष चुनाव – आयोग बनाओ ;
निष्पक्ष चुनाव-आयोग बनेगा कैसे,सुप्रीम कोर्ट तुम आगे आओ ।
अब केवल सुप्रीम-कोर्ट ही , भारत-वर्ष बचा सकता है ;
निष्पक्ष चुनाव करा सकता है , जंगल-राज हटा सकता है ।
जंगल-राज भी इससे अच्छा , है जंगल का कानून वहाॅं पर ;
पूरा-नंगा कानून यहाॅं पर , राजनीति कुलटा है जहाॅं पर ।
राजनीति जब कुलटा होती , लोकतंत्र मिट जाता है ;
मुट्ठी-भर लोगों के हाथों , पूरा-शासन आ जाता है ।
धर्महीन ये राजनीति है , पूरी तरह से वैश्या है ;
जब शासन करते चरित्रहीन हैं , इसको बना दिया वैसा है ।
इसीलिये बनते गलियारे , हिंदू – मंदिर टूट रहे हैं ;
जो हिंदू ! चुपचाप देखता , उसके भाग्य तो फूट रहे हैं ।
धर्म से दूर हो रहा हिंदू ! अपनी मौत बुलाता है ;
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , गजवायेहिंद कराता है ।
पूरी-दुनिया से अलग-थलग , इसने भारत को कर रखा है ;
भारत के दुश्मन म्लेच्छ-देश हैं , उनको न्योता दे रखा है ।
कश्मीर तो पूरा गया ही समझो , मनीपुर की बारी है ;
केरल – बंगाल भी जाने वाला , पूरे भारत की बारी है ।
“भविष्य-मालिका” भविष्य का दर्शन , स्पष्ट रूप से अंकित है ;
धर्महीन-अज्ञानी हिंदू ! अब भारत में नहीं सुरक्षित है ।
सबसे बुरा समय भारत का , बहुत शीघ्र आने वाला है ;
हिंदू ! पर जेहादी – हमला , म्लेच्छों का होने वाला है ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू ! एक भी नहीं बच पायेगा ;
गलबहियाॅं जिनसे करते हैं , उनसे ही धोखा खायेगा ।
शत्रुबोध से हीन जो हिंदू ! किसी तरह न बच पायेगा ;
आस्तीन के सांपों द्वारा , वो हिंदू ! काटा जायेगा ।
अपूज्या यत्र पूज्यन्ते , पूज्यानामवमानना ;
त्रीण तत्र प्रवर्तन्ते , दुर्भिक्षं मरणं भयम् ।
“शिव-पुराण” में मंत्र है वर्णित , साक्षात सामने दिखता है ;
सब के सब अपूज्य हैं नेता , इसी से हिंदू ! मिटता है ।
होनी अब नहीं है रुकने वाली , हिंदू ! बस ये कर सकता है ;
धर्म-सनातन में आ करके , वो हिंदू ! बच सकता है ।
धर्म-मार्ग में हिंदू ! आयेगा , “विष्णु-कृपा” को पायेगा ;
इससे रहित है जितना मानव , महायुद्ध में मिट जायेगा ।
