Allahabad High Court ने उत्तर प्रदेश धर्मांतरण कानून से जुड़े एक मामले में प्रयागराज के ADM (प्रशासन) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई। मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था, जिसने मुस्लिम धर्म छोड़कर स्वेच्छा से सनातन/हिंदू धर्म अपनाने की घोषणा की थी, लेकिन ADM ने उसका धर्मांतरण प्रमाणन आवेदन खारिज कर दिया था।
क्या है मामला?
मामला इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर अनिल पंडित से जुड़ा है, जिनका पूर्व नाम मोहम्मद अहसान था। उन्होंने 12 जनवरी 2022 को यूपी धर्मांतरण कानून की धारा 8 के तहत धर्म परिवर्तन की घोषणा दी थी। बाद में 14 मार्च 2022 को आर्य समाज मंदिर में धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
2022 और 2023 में हुई पुलिस जांच रिपोर्टों में यह कहा गया कि धर्मांतरण स्वेच्छा से हुआ था और इसमें किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या जबरदस्ती नहीं पाई गई। इसके बावजूद ADM ने एक और जांच रिपोर्ट मंगवाई, क्योंकि याचिकाकर्ता के ससुर ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई थी।
ADM ने आवेदन क्यों खारिज किया?
9 अगस्त 2024 को ADM ने धर्मांतरण प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया। आदेश में FIR, चार्जशीट और दंपति के बीच हुए ₹1 लाख के लेनदेन को आधार बनाया गया। ADM ने यह माना कि धर्मांतरण विवाह के उद्देश्य से और कथित प्रभाव में किया गया।
हाईकोर्ट का सख्त रुख।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने ADM के आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया और तीन सप्ताह के भीतर नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ADM को कानून के तहत केवल निर्धारित प्रक्रिया की जांच करनी थी, न कि विवाह की वैधता या आपराधिक मामले के आधार पर धर्मांतरण को अस्वीकार करना था।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी।
हाईकोर्ट ने कहा कि FIR दर्ज होने के बाद बार-बार जांच कराना ADM द्वारा ऐसी शक्ति का प्रयोग था, जो कानून ने उसे दी ही नहीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल चार्जशीट दाखिल होने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं माना जा सकता, क्योंकि अपराध सिद्ध होना ट्रायल का विषय है।
दंपति से बातचीत के बाद कोर्ट का निष्कर्ष।
अदालत ने दंपति से व्यक्तिगत बातचीत की और पाया कि दोनों ने स्वेच्छा से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया था। पत्नी ने कोर्ट को बताया कि ₹1 लाख की रकम मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मित्र के रूप में दी गई आर्थिक सहायता थी।
दंपति को राहत।
हाईकोर्ट ने कहा कि दंपति सम्मानपूर्वक वैवाहिक जीवन जीने के लिए स्वतंत्र हैं और पुलिस उनके जीवन में हस्तक्षेप नहीं करेगी। मामले की अगली सुनवाई 27 मई 2026 को होगी।
Case Title: Anil Pandit @ Mohammad Ahsan v. State of U.P. & Ors.
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