संदीपदेव । ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘प्रॉक्सी वार’ से निकल कर खुद मोर्चा संभाल लिया है।
इस वर्ष 2026 में सबसे पहले योगी सरकार ने ज्योतिषपीठाधीश्वर को माघ मेले में कुचलना चाहा, क्योंकि शंकराचार्य जी ने पिछले वर्ष 2025 में प्रयाग में हुए कुंभ में भगदड़ में मरे हिंदुओं की लाशों को छुपाने, उन पर झूठ बोलने और मृत हिंदुओं के प्रति असंवेदनशीलता के कारण योगी आदित्यनाथ से इस्तीफा मांग लिया था!
योगी की टीस यह भी है कि वह उत्तर प्रदेश में अवैध कत्लखना बंद करने का नारा लगाते हुए सत्ता में आए थे, लेकिन भाजपा के ही विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने यह पोल खोल दिया कि उत्तरप्रदेश में प्रतिदिन 50,000 गाय अभी भी कट रही है!
शंकराचार्य जी के ‘गो माता-राष्ट्र माता’ के ‘गो-रक्ष अभियान’ के कारण गोरक्षपीठ पर बैठे योगी तिलमिलाए हुए हैं! आखिर उनकी पार्टी भाजपा बीफ एक्सपोर्टरों से चंदा लेती है, तो वह गाय कटना कैसे रोकें? कत्लखाने पर सब्सिडी को कैसे न बढ़ाएं? भले उनके आदि गुरु गोरखनाथ की आत्मा ही लहुलुहान क्यों न हो रही हो?
इस वर्ष माघ मेले में सारी अति को पार करते हुए योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने पहले शंकराचार्य जी को गंगा स्नान से रोका, फिर उनके शिष्यों को शिखा से घसीटते हुए पीटा, उनके कपड़े फाड़े! है योगी प्रशासन में हिम्मत कि किसी मुस्लिम की दाढ़ी पकड़ कर खींचे? उनकी टोपी उतारे? जैसे शंकराचार्य के ब्राह्मण बटुकों की शिखा पकड़ कर खींचा था?
यहां भी शंकराचार्य जी जब नहीं झुके तो फिर उनको नोटिस देकर योगी प्रशासन ने कहा कि आप शंकराचार्य हैं, इसे साबित कीजिए? जब शंकराचार्य जी ने उनसे उल्टा पूछ लिया कि आप 40 दिन के अंदर साबित करें कि आप हिंदू हैं? क्योंकि किसी हिंदू शासक के शासनकाल में गाय काटी जा रही है और वह चुपचाप बैठा रहे, फिर वह कैसा हिंदू है?
यहां भी मुंह की खाने के बाद योगी ने फिर ‘प्रॉक्सी वॉर’ करते हुए भाजपाई संत रामभद्राचार्य के चेले आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा घिनौने ‘पॉस्को’ एक्ट में शंकराचार्य जी पर कार्रवाई करना चाहा, जबकि आशुतोष ब्रह्मचारी एक ईनामी हिस्ट्रीशीटर है, जिसका एक लंबा आपराधिक इतिहास है। उस की गिरफ्तारी पर कभी 25 हजार रुपए का ईनाम था, उस हिस्ट्रीशीटर का उपयोग योगी प्रशासन ने किया शंकराचार्य जी के विरुद्ध!
रामभद्राचार्य का शिष्य आशुतोष जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद इस्लाम अपनाने तक की घोषणा कर चुका है, ऐसे हिंदू द्रोही के जरिए शंकराचार्य जी के चरित्र हनन का प्रयास कर शासन-प्रशासन ने यह दर्शा दिया है कि उसकी मंशा कितनी नीच और गिरी हुई है?
इस पर भी जब जगतगुरु अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी नहीं झुके तो ‘प्रॉक्सी वार’ से बाहर निकलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कल खुद विधानसभा में मोर्चा संभाला और उन पर प्रहार करते हुए कहा कि ‘हर कोई शंकराचार्य नहीं लिख सकता।’
यह कह कर योगी ने अपना अहंकार और अपनी अज्ञानता, दोनों का एक साथ प्रदर्शन किया है। योगी को अपने ‘संघी शंकराचार्य’ और अदालतों द्वारा ‘फ्रॉड’ घोषित वासुदेवानंद सरस्वती के विरुद्ध निचली अदालत, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का न तो पता है, न कि शंकराचार्य कैसे चुनते हैं, इस परंपरा का ज्ञान है और न ही आदि शंकराचार्य ने ‘मठाम्नाय महानुशासनम्’ में इसकी क्या व्यवस्था दी है, इसका ही ज्ञान है!
अपने रिश्तेदार महंत अवेद्यनाथ जी के द्वारा गोरक्षपीठ पर बैठाए गये योगी आदित्यनाथ से ही पूछ लिया जाए कि आपका चयन गुरु-शिष्य परंपरा से हुआ है या ‘नातेदारवाद’ से? तो कैसा लगेगा उन्हें?
क्या गोरखनाथ जी ने किसी पीठ पर रिश्तेदारों को महंत बनाने का कोई विधान दिया है? नहीं न? यहां तक कि गोरखनाथ जी की परंपरा में तो गोपीनाथ जी ने अपनी माता तक का त्याग किया था। लेकिन अजय सिंह बिष्ट ऊर्फ योगी आदित्यनाथ का तो चयन ही महंत अवेद्यनाथ जी ने अपने रिश्तेदार के कारण किया था? फिर क्या जवाब देंगे योगी जी?
वैसे योगी जी आपके ‘संघी शंकराचार्य’ वासुदेवानंद सरस्वती जी को तो अब AI भी फर्जी बताने लगा है! एक और फर्जी शंकराचार्य अधोक्षजानंद का आप लोग पुरी पीठाधीश्वर के रूप में चरण पखाड़ ही रहे हैं! नकली शंकराचार्य बनाने का इतिहास संघियों का है और आप सवाल पूछ रहे हैं असली शंकराचार्य जी से? इन नकली हिंदुवादी संघियों की आंख का पानी कब का मर चुका है!
वैसे भी राजसत्ता यह तय नहीं करेगी कि हिंदुओं का धर्म गुरु कौन होगा? सनातन धर्म में राजसत्ता के ऊपर धर्म की सत्ता सदा से रही है।
योगी जी आप न तो ढंग से धर्म गुरु ही बन पाए और ‘दिल्ली सल्तनत’ के पीछे-पीछे चलकर आप ढंग के शासक भी नहीं बन पाए! इतने लंबे शासन के लिए आपको हिंदुओं ने चुना, लेकिन करोडों हिंदुओं का विश्वास अपने चकनाचूर किया है।
योगी जी योग की कठिन साधना के बिना आप स्वयं को योगी भले लिखते रहिए, लेकिन हां, आप यह तय नहीं करेंगे कि हम सनातनधर्मियों के शंकराचार्य कौन होंगे?
