संदीप देव। भारतीय रक्षा इतिहास में ‘तेजस’ (LCA) केवल एक विमान नहीं, बल्कि भारत की ‘हवाई संप्रभुता’ का घोषणापत्र था। 1980 के दशक में जब भारत ने एक हल्के और स्वदेशी लड़ाकू विमान की कल्पना की थी, तब उद्देश्य केवल आयात कम करना नहीं, बल्कि महाशक्तियों की तकनीकी गुलामी से मुक्त होना था। लेकिन चार दशक बाद भी, आज तेजस के दर्जनों एयरफ्रेम बेंगलुरु और नासिक के रनवे पर खड़े केवल इसलिए धूल फांक रहे हैं क्योंकि उनमें लगने वाले ‘दिल’ यानी इंजन की धड़कन ‘वाशिंगटन’ के हाथों में कैद है!
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