“विजय-थलापति” जैसे नेता को
जब नेता बनता अभिनेता, तो देश का बन जाता दुर्भाग्य ;
पर जब अभिनेता नेता बनता, तब देश का होता है सौभाग्य ।
चाहो तो इतिहास देख लो, ठोंक-बजा कर ठीक से देखो ;
उत्तर-दक्षिण की तुलना करके,दक्षिण-भारत की उन्नति देखो ।
जमीं-आसमां का अंतर है , अंधभक्त सब आंखें खोलें ;
दक्षिण-भारत जाकर देखें , बिन देखे कुछ भी न बोलें ।
वहाॅं के जाने कितने नेता ? भूतपूर्व अभिनेता हैं ;
जो भी अच्छा – अभिनेता था , अच्छा – शासन देता है ।
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता, बन गया ये गंदा-अभिनेता है ;
लिजलिजा है पूरा गंदा-जीवन , देश को धोखा देता है ।
कहने भर को ये नेता है, नेतृत्व का कोई नहीं है गुण ;
“एपस्टीन-फाइल” का पापी , केवल अवगुण व दुर्गुण ।
भोली – भाली हिंदू – जनता , धर्महीन – अज्ञानी है ;
तिलक – त्रिपुण्ड में फंसी हुई है , धोखे से अनजानी है ।
अंधभक्त जो महामूर्ख हैं , अपने हत्यारे पहचान न पाते ;
हत्यारों को सत्ता देकर , सब अपनी गर्दन कटवाते ।
पहले धोखे से कब्जा पाया , अब कब्जा नाजायज है ;
सारा-सिस्टम फांस लिया है , कुछ भी कहीं न जायज है ।
हर-संस्थान कर दिया बधिया , पूरी तरह नपुंसक हैं ;
देश के चारों-अंग नपुंसक, केवल कमजोरों पर हिंसक हैं ।
देश की सबसे-बड़ी हानि है, सुप्रीम-कोर्ट का बधिया होना ;
मुट्ठी भर ही सत्यनिष्ठ हैं , लगता है पूर्ण-विनाश ही होना ।
लोकतंत्र मिट रहा देश से , लूटतंत्र बढ़ता जाता है ;
बहुत-बुरे हालात देश के, चीन भी अंदर घुसता जाता है ।
भारत का नेता किसका प्यादा?चीन-अमेरिका का प्यादा है ;
चीन पर जितनी भूमि लुटाई , नेहरू से भी ज्यादा है ।
ये देश के टुकड़े करना चाहे , देशभक्ति का दुश्मन है ;
जागो सेना और “जेन-जी” , देश के हित का करो जतन है ।
मरता हुआ ये देश बचाओ, है सेना का कर्तव्य यही ;
अभी नहीं तो कभी नहीं , ये मिट न जाये देश कहीं ।
राष्ट्रीय-सरकार बनानी होगी , हर-दल को शामिल करके ;
फिर निष्पक्ष-चुनाव कराओ, चुनाव-आयोग ठीक करके ।
“विजय-थलापति” जैसे नेता को,देश की सत्ता सौंपनी होगी ;
जाति-धर्म से ऊपर उठकर, देश की रक्षा करनी होगी ।
देश बचेगा सभी बचेंगे , वरना सबको मिट जाना है ;
अब सबको यही ठानना होगा , अच्छी-सरकार बनाना है ।
“जय-हिंद” , ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
