कभी 600 किलो सोना दान की थी। कहानी सबसे अमीर महाराज के तीसरी महारानी की नरेंद्र नाथ मिश्रा के कलम से। समय का चक्र गजब होता है। कल बिहार के दरभंगा महाराजा कामेश्वर सिंह की पत्नी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया। अब तक वह जिंदा थी। आज लोगों को पह कोई आम महाराजा परिवार की महारानी इन्हें समझते होंगे लेकिन कामसुंदरी देवी उस रियासत की महारानी थी जो अपने जमाने में भारत की सबसे अमीर और प्रतिष्ठित मानी जाती थी।

जरा जानें वह किनकी पत्नी थी और क्या महत्व-रसूख था दरभंगा महाराज का
दरभंगा राज के आखिरी महाराज कामेश्वर सिंह तो अपनी शान-ओ-शौकत के लिए पूरी दुनिया में मशहूर थे. इनसे प्रभावित होकर ही अंग्रेजों ने उन्हें महाराजाधिराज की उपाधि दी थी। वे भारत में संविधान बनाने वाली ड्राफ कमिटी के मेंबर थे। जब चीन से भारत का युद्ध हुआ तब इन्होंने सरकार को बहुत बड़ी मात्रा में सोना दान किया। पूरे भारत में सरकार को दान करने वालों में सबसे ऊपर थे। दरभंगा महाराज के घर तक रेल लाइन बिछी थी, जिसकी ट्रेन और महल सरीखे सैलून की चर्चा हमेशा होती है। तब इस राज परिवार के पास अपना प्राइवेट प्लेन भी था। दूसरे विश्वयुद्ध के वक्त दरभंगा महाराज ने एयरफोर्स को तीन फाइटर प्लेन दिए थे। मौजूदा दरभंगा एयरपोर्ट की हवाई पट्टी इन्होंने ही तब बनायी थी। दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह की शानो-ओ-शौकत ऐसी थी कि ना सिर्फ देशभर के तमाम रजवाड़े उनके यहां कार्यक्रम में पहुंचते थे, बल्कि ब्रिटिश वायसराय से लेकर लंदन के लोग भी शामिल होना चाहते थे। महात्मा गांधी भी इनके घर आ चुके हैं।
बकिंघम पैलेस की तरह है नरगोना महल
दरभंगा राज के सबसे विख्यात महाराजा कामेश्वर सिंह के नरगोना पैलेस घर तक रेल लाइन बिछी थी, जिसकी ट्रेन और महल सरीखे सैलून की चर्चा हमेशा होती है। पूरे विश्व में पेरिस,न्यूयार्क,लंदन,रोम जैसे शहरों के अलावा देश के तमाम शहरों में विशाल दरभंगा हाउस उन्होंने बनाया था जो बाद में विश्वविद्यालय या दूसरे बड़े भवनों में तब्दील हुआ। तब टाटा कंपनी में इनका बड़ा शेयर था।दरभंगा महाराज ने बीएचयू,अलीगढ़ विश्वविद्यालय,कोलकोता,पटना विश्वविद्यालय के गठन के लिए बड़ी राशि दी।

ऐसी महाराज की पत्नी का आज निधन हुआ है। बस बताने के लिए कि वक्त के साथ आपका यश-शौर्य-धन-दौलत सबसे नेपथ्य में चला जाता है।
