संदीप देव। रामायण का समाजशास्त्र कैसे नयी पीढ़ी की सोच में परिवर्तन ला रहा है, नीचे के उदाहरण से समझिए।(Pic1) एक पुत्र ने आवेश में अपनी मां से कटु वचन बोल दिया, लेकिन #JWSD पर रामायण का वाचन सुनकर तुरंत उसने अपनी माता से माफी मांगी।

एक-एक हिंदू के अंदर सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता वाल्मीकि रामायण में है। हमारे कथा वाचकों ने इस पर ध्यान न देकर अली-मौला और नाच-गाने पर ध्यान देकर रामायण के सकारात्मक पक्ष को जानबूझकर कर ढंकने का षड्यंत्र किया है।
इसी तरह एक अन्य स्क्रीन शाट(Pic2) में देखिए। हमारे देश को समाजवाद की घुट्टी पिलाकर लोगों की सोच को कैसे गरीब बनाया गया है, लेकिन रामायण में युद्ध के बीच में लक्ष्मण जी ने बड़े भैया श्रीराम को धन की महिमा को जिस तरह समझाया है, वह यदि सनातनियों के अंदर उतर गया तो एक भी सनातनी गरीब नहीं मरेगा।

कल के एपिसोड में मैंने इसकी व्याख्या की है। लक्ष्मणजी के विचार के आगे आज के बड़े-बड़े मोटिवेशनल स्पीकर फेल हो जाएंगे। लक्ष्मणजी ने जिस तरह चारों पुरुषार्थों को समझाया है और वाल्मीकि जी ने जैसे उसे उद्घाटित किया है, वह बेहद प्रशंसनीय है।
नीचे कल का लिंक है, आप देखिए और समाजवाद के रूप में ट्यून किए गये अपने दिमाग को झटक कर बाहर निकलिए।
माता लक्ष्मी के उपासक सनातनियों को पता नहीं किसने (ऊपर-ऊपर, अंदर से तो सभी धनवान बनना चाहते हैं) धन की बुराई करना सिखा दिया? जिनकी बुराई करोगे, वह (मां लक्ष्मी) तुम्हारे घर कैसे आएंगी? यह साधारण विवेक भी सनातनी नहीं कर पाते! रामायण सुनिए और अपना जीवन बदलिए। धन्यवाद। जयश्री राम।
युद्ध के बीच में लक्ष्मण जी ने श्रीराम को दिया महाज्ञान। https://youtube.com/live/9wdRPNcvck4?feature=share
